
सनातन धर्म की परंपरा वैज्ञानिक है । विश्व में सनातन विचार ही संपूर्णतया वैज्ञानिक विचार हैं, इसके प्रति हमारी दृढ श्रद्धा होनी चाहिए । जो धर्म व्यक्ति, समाज, प्रकृति एवं परमात्मा में संतुलन बनाए रखता है, वह सनातन धर्म है । विज्ञान एवं प्रकृति के नियम जैसे सर्वत्र समान होते हैं, वैसे ही सनातन धर्म के नियम भी सर्वत्र समान ही होते हैं । सनातन धर्म के नियमों में पूरे विश्व के कल्याण की क्षमता है ।
स्वतंत्रता के ७८ वर्ष उपरांत भी हमारे देश पर अंग्रेजों का शासन होने के कारण हमारा देश धर्मशाला बन चुका है । तो इसमें हमें मुक्त वातावरण कौन देगा ? अब आवश्यकता है समाज को प्रतिकार के कर्तव्य के लिए तैयार करने की ! ‘बटेंगे तो कटेंगे’ के स्थान पर अब ‘जीतेंगे तो ही जीत पाएंगे’, इसे ध्यान में रखना चाहिए । सनातन धर्म में बाधा बननेवाले सभी कानूनों को निरस्त कर हम अपने कानून बनाएंगे । हमारे देश में कौनसे कानून होने चाहिए ?, इसके लिए प्रयास करने की आवश्यकता है ।
सनातन के एक हाथ में जपमाला तथा दूसरे हाथ में भाला है !

कुछ वर्ष पूर्व जब मैंने ‘सनातन प्रभात’, यह शब्द पढा, उस समय मुझे इस बात की आशंका थी कि ऐसे समाचारपत्र पढनेवाले कितने लोग होंगे ?, ये लोग कैसे सफल रहेंगे ?; परंतु सनातन संस्था के कार्य ने मेरी सभी शंकाओं का समाधान किया है । सनातन संस्था ने जागृति की । सनातन धर्म का बोध करानेवाली संस्था के रूप में मैं सनातन संस्था की ओर देखता हूं ।
सनातन संस्था का संपूर्ण कार्य आध्यात्मिकता की नींव पर खडा है । अध्यात्म का ग्रंथ ‘भगवद्गीता’ युद्ध की भूमि पर विशद किया गया है । उसी प्रकार से सनातन संस्था ने भी अध्यात्म से लेकर युद्ध तक की जागृति की है । मैंने इस महोत्सव में युद्धकलाओं की प्रदर्शनी देखी । मुझे लगता है, ‘देश के सभी संतों को अपने शिष्यों को यह सिखाना चाहिए ।’ सनातन संस्था की साधना में एक हाथ में जपमाला, जबकि दूसरे हाथ में भाला है । हम केवल जाप करते बैठे, तो काम नहीं चलेगा । अतः भगवान श्रीकृष्ण ने भी अर्जुन को बताया था, ‘तुम मेरा स्मरण करो; परंतु युद्ध करो !’
सत्यनिष्ठ हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन है ‘सनातन संस्था’ !

सनातन संस्था संस्कारों की सिंचाई का कार्य कर रही है । वर्ष २०१८ में कुछ धर्मांधों ने सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने की मांग की । मैंने सनातन संस्था का कार्य बहुत निकटता से देखा है; इसलिए जब मैं ‘इंडिया टुडे’ में उपसंपादक था, तब मैंने सनातन संस्था के समर्थन में लेख लिखा । उसमें मैंने ऐसा लिखा था, ‘यदि प्रतिबंध ही लाना है, तो तबलिगी जमात, देवबंद जैसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाएं । सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव तो कलियुग का एकत्रीकरण है !
– श्री. उदय माहुरकर
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