उडुपी (कर्नाटक) के छात्र बना रहे हैं पौरोहित्य में ‘करियर’

  • विदेशों में बनेंगे पुरोहित ।

  • संस्कृत सहित तीन भाषाओं में प्रशिक्षण ।

  • वेद-शास्त्रों के साथ कंप्यूटर और विज्ञान की भी शिक्षा।

श्रीपुथिगे मठ के व्यवस्थापक श्री सुगुणेंद्र तीर्थ स्वामीजी

उडुपी (कर्नाटक): आजकल जहाँ अधिकतर छात्र आधुनिक डॉक्टर, इंजीनियर आदि बनने के पीछे लगे हैं, वहीं उडुपी के श्रीपुथिगे मठ द्वारा संचालित सुगुण नामक विद्यालय के छात्र पौरोहित्य (पुरोहित बनना) में करियर (आजीविका के लिए व्यवसाय ) बनाने में लगे हैं। इस विद्यालय का प्रत्येक छात्र अंग्रेज़ी, संस्कृत और कन्नड़ भाषा बोल, पढ़ और लिख सकता है। इस विद्यालय की स्थापना ९ वर्ष पहले की गई थी।

१. पुरोहित बनने के लिए इस विद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को अनुष्ठान, कर्मकांड के साथ-साथ कर्तव्य और नैतिकता का भी ज्ञान दिया जाता है। उन्हें पशुओं के प्रति दया और बड़ों का सम्मान करना भी सिखाया जाता है।

२. मानव और प्रकृति के परस्पर संबंध, अनुशासित जीवनशैली, चिंतनशील जीवन के पीछे वैदिक दृष्टिकोण आदि की भी जानकारी दी जाती है। श्रीपुथिगे मठ के स्वामी प्रसन्नाचार्य ने बताया कि वर्तमान में सभी छात्र ब्राह्मण समाज से हैं, लेकिन हमें आशा है कि भविष्य में देश के सभी भागों से, सभी जातियों के छात्र यहाँ आएँगे और ज्ञान-विज्ञान के साथ पुरोहित बनने का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

३. इस विद्यालय का संचालन राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (National Institute of Open Schooling) के अंतर्गत किया जाता है। श्रीपुथिगे मठ ने बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता और हिरियडका में भी विद्यालय शुरू किए हैं, जहाँ कुल २५० छात्र अध्ययन कर रहे हैं। यहाँ रहने, भोजन और शिक्षा शुल्क के रूप में प्रतिवर्ष १६,००० रुपये लिए जाते हैं।

विदेशों में पुरोहितों की कमी को पूरा करेंगे – मठ के व्यवस्थापक

इस बारे में जानकारी देते हुए श्रीपुथिगे मठ के व्यवस्थापक श्री सुगुणेंद्र तीर्थ स्वामीजी ने कहा, “अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय देशों में हिंदू जनसंख्या बढ़ रही है। मंदिरों की संख्या भी बढ़ रही है, लेकिन वहाँ पुरोहित और आचार्यों की कमी महसूस की जाती है। इन देशों में बसे लोगों का भारतीय संस्कृति से संबंध बना रहे, इसलिए हम इन छात्रों को तैयार कर रहे हैं। यहाँ के छात्र इस शिक्षा से बहुत प्रसन्न हैं।”