सनातन का ग्रंथ

साधना का महत्त्व एवं प्रकार
- धर्माचरण के साथ साधना करना क्यों आवश्यक है ?
- सकाम साधना से निष्काम साधना क्यों महत्त्वपूर्ण है?
- साधना का प्रकार स्वयं निर्धारित क्यों न करें ?
- गुरु के मार्गदर्शन में ही साधना क्यों करनी चाहिए ?
व्यष्टि एवं समष्टि साधना (प्रत्यक्ष साधना)
व्यष्टि साधना (व्यक्तिगत साधना) कितनी भी कर लें, किन्तु समष्टि साधना (समाज की उन्नति हेतु साधना) किए बिना ईश्वरप्राप्ति नहीं होती ! व्यष्टि साधना के साथ समष्टि साधना की (राष्ट्ररक्षा, धर्मजागृति की) अनिवार्यता इस ग्रन्थ में स्पष्ट की है ।
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सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?