सनातन का ग्रंथ

साधना का महत्त्व एवं प्रकार
- धर्माचरण के साथ साधना करना क्यों आवश्यक है ?
- सकाम साधना से निष्काम साधना क्यों महत्त्वपूर्ण है?
- साधना का प्रकार स्वयं निर्धारित क्यों न करें ?
- गुरु के मार्गदर्शन में ही साधना क्यों करनी चाहिए ?
व्यष्टि एवं समष्टि साधना (प्रत्यक्ष साधना)
व्यष्टि साधना (व्यक्तिगत साधना) कितनी भी कर लें, किन्तु समष्टि साधना (समाज की उन्नति हेतु साधना) किए बिना ईश्वरप्राप्ति नहीं होती ! व्यष्टि साधना के साथ समष्टि साधना की (राष्ट्ररक्षा, धर्मजागृति की) अनिवार्यता इस ग्रन्थ में स्पष्ट की है ।
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सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
मुंबापुरी में सहस्रों के समष्टि संकल्प से राष्ट्ररक्षा हेतु प्राप्त हुआ आध्यात्मिक बल !
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संपादकीय : राष्ट्र के लिए त्याग करें !
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