सनातन का ग्रंथ

साधना का महत्त्व एवं प्रकार
- धर्माचरण के साथ साधना करना क्यों आवश्यक है ?
- सकाम साधना से निष्काम साधना क्यों महत्त्वपूर्ण है?
- साधना का प्रकार स्वयं निर्धारित क्यों न करें ?
- गुरु के मार्गदर्शन में ही साधना क्यों करनी चाहिए ?
व्यष्टि एवं समष्टि साधना (प्रत्यक्ष साधना)
व्यष्टि साधना (व्यक्तिगत साधना) कितनी भी कर लें, किन्तु समष्टि साधना (समाज की उन्नति हेतु साधना) किए बिना ईश्वरप्राप्ति नहीं होती ! व्यष्टि साधना के साथ समष्टि साधना की (राष्ट्ररक्षा, धर्मजागृति की) अनिवार्यता इस ग्रन्थ में स्पष्ट की है ।
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सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
हरियाणा में सनातन संस्था द्वारा आयोजित निःशुल्क सनातन संस्कार प्रशिक्षण शिविर संपन्न
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !