केंद्रीय अन्वेषण विभाग द्वारा ध्यान में लाकर देने के पश्चात कार्यवाही की गई !

पाटलिपुत्र (बिहार) – यहां के प्रसिद्ध पारस चिकित्सालय में डॉक्टर के रूप में नौकरी करनेवाला महम्मद शमीम फारूकी के बनावटी डॉक्टर होने की घटना सामने आने पर उसे पदच्युत कर दिया गया है । उसके विरुद्ध अपराध प्रविष्ट है तथा वह लापता हो गया है । पुलिस उसे ढूंढ रही है ।
फारूकी मूलत: बिहार राज्य के दरभंगा जिले का निवासी है तथा उसने चिकित्सकीय शिक्षा हेतु नेपाल के काठमांडू विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया । वहां की परीक्षा मेंअनुत्तीर्ण होने के उपरांत भी वहां के विश्वविद्यालय से बनावटी पदवी (डिग्री)बनवा ली । विदेश से चिकित्सकीय पदवी प्राप्त डॉक्टर को भारत में व्यवसाय करने हेतु आवश्यक ‘फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट’ परीक्षा में भी वह अनुत्तीर्ण हुआ था । तब भी उसने इस परीक्षा में उत्तीर्ण महम्मद जावेद नामक डॉक्टर के कागदपत्र (डॉकुमेंट्स) प्राप्त कर प्रशस्तिपत्रक बनवा लिया तथा उसके आधार पर हरियाणा के एक चिकित्सालय में कुछ समय तथा दिसंबर २०२० से पाटलिपुत्र के पारस चिकित्सालय में नौकरी करने लगा ।
(सौजन्य : Zee Bihar Jharkhand)
केंद्रीय अन्वेषण विभाग द्वारा दिसंबर २०२२ में पूरे देश में ऐसे ७४ बनावटी डॉक्टरों की सूची घोषित करने पर भी पूरे ६ माह तक पारस चिकित्सालय को यह ज्ञात नहीं था कि फारूकी का नाम उस सूची में है । कुछ दिन पूर्व जब केंद्रीय अन्वेषण विभाग ने इस विषय की जानकारी चिकित्सालय को दी, तब चिकित्सालय ने उसे पदच्युत किया ।
संपादकीय भूमिकायदि केंद्रीय अन्वेषण विभाग ने इस विषय में जानकारी नहीं दी होती, तो यह डॉक्टर वैसे ही कार्यरत रहा होता ! इसलिए उसे नौकरी पर रख कर रोगियों का जीवन संकट में डालनेवाले चिकित्सालय के व्यवस्थापन की जांच कर दोषी अधिकारियों पर भी कडी कार्यवाही होना आवश्यक ! |
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