रूस-यूक्रेन संघर्ष पर विदेश मंत्री जयशंकर का कड़ा बयान !

नई दिल्ली – मैं अन्य लोगों (पश्चिमी देशों) की मांगों के अनुसार विदेश नीति की योजना नहीं बनाता। मेरी विदेश नीति मेरे देश और मेरे नागरिकों के हित में है। भारत ने कभी-कभी पश्चिम के विचारों के अनुसार नीतियां बनाई हैं। इसलिए अब उन्हें भी भारत की नीति को स्वीकार कर लेनी चाहिए, भारत के विदेश मंत्री ने दृढ़तापूर्वक कहा । एस. जयशंकर एक अंग्रेजी समाचार वाहिनी के कार्यक्रम में बोल रहे थे । पश्चिमी देशों का आग्रह है कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में भारत को किसी एक का पक्ष लेना चाहिए । भारत ने इस पर किसी एक का पक्षधर नहीं है । जयशंकर ने इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट की ।
१. डॉ. जयशंकर ने आगे कहा कि मुझे लगता है कि भारत के हित योग्य रूप में साध्य हुए हैं । हम सदैव संप्रभुता के पक्षधर रहे हैं एवं हम संघर्ष का अंत चाहते हैं। यदि मैं अमेरिका के अनुसार अपनी भूमिका प्रस्तुत करता, तो इससे न तो मेरा हित होता न ही, वह किसी अन्य के लिए उपयोगी होता ।
२. जिहादी आतंकवाद के लिए पाकिस्तान को सुरक्षित आश्रय स्थान बताते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे पर दो देशों का सहमत होना असंभव है। विश्व एक कठिन जगह है और यह भारत के लिए भी सरल नहीं है।
३. उन्होंने पूर्व सरकारों की परोक्ष रूप से आलोचना करते हुए कहा कि १९६२ के भारत-चीन युद्ध में हमारी पराजय हुई थी। वास्तविक नियंत्रण रेखा के क्षेत्र में हमने जो भूभाग गंवाए थे,आज वहां गांव बसाए जा रहे हैं।
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