।। श्रीकृष्णाय नम: ।।

सामुदायिक नामजप, देवताओंके त्योहार-उत्सव मनाना, परिजन और इष्टमित्रोंसहित तीर्थयात्रा आदि धार्मिक कार्य देवताओंको प्रसन्न करनेके लिये किये जाते हैं । इनको करनेसे अच्छे संस्कार, सात्विक वृत्ति, ईश्वरमें रुचि सभीके मनमें अंकित होनेमें सहायता होती है । यह आरंभिक साधना है ।
आगे चलकर, प्रगतिके लिये व्यक्तिगत प्रयास अत्यावश्यक हैं । मोक्षप्राप्तिके लिये प्रयास केवल अकेलेको ही करने पडते हैं और मोक्षप्राप्ति केवल अकेलेको ही होती है । – अनंत आठवले. २२.०९.२०२२
।। श्रीकृष्णार्पणमस्तु ।।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?