।। श्रीकृष्णाय नम: ।।

सामुदायिक नामजप, देवताओंके त्योहार-उत्सव मनाना, परिजन और इष्टमित्रोंसहित तीर्थयात्रा आदि धार्मिक कार्य देवताओंको प्रसन्न करनेके लिये किये जाते हैं । इनको करनेसे अच्छे संस्कार, सात्विक वृत्ति, ईश्वरमें रुचि सभीके मनमें अंकित होनेमें सहायता होती है । यह आरंभिक साधना है ।
आगे चलकर, प्रगतिके लिये व्यक्तिगत प्रयास अत्यावश्यक हैं । मोक्षप्राप्तिके लिये प्रयास केवल अकेलेको ही करने पडते हैं और मोक्षप्राप्ति केवल अकेलेको ही होती है । – अनंत आठवले. २२.०९.२०२२
।। श्रीकृष्णार्पणमस्तु ।।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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