
‘प्रसार के अधिकांश साधक पारिवारिक दायित्व संभालते हुए धर्मप्रसार की सेवा करते हैं । जिस समय वे घर में रहते हैं, उस समय कुछ साधक सेवा के संदर्भ में उन्हें भ्रमणभाष पर संपर्क करते हैं तथा सेवा के संदर्भ में बातें करते हैं । इससे घर का कार्य करते समय बाधाएं आती हैं । इससे परिवारवालों को कष्ट हो सकते हैं । साथ ही कार्यालय में कार्य करते समय तथा व्यवसाय करनेवाले साधकों को भी इस प्रकार की बाधाएं आ सकती हैं । यह टालने के लिए प्रसार में रहनेवाले साधक अपना उपलब्ध समय सूचित करें । आश्रम में रहनेवाले साधक भी ‘घर में अपने परिवारवालों को किस समय पर संपर्क करें ? यह सूचित करें !’
– श्रीसत्शक्ति (श्रीमती बिंदा सिंगबाळ, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा । (८.१०.२०२२)
हिन्दुओ, तृतीय विश्वयुद्ध के दुष्परिणाम टालने के लिए यज्ञसंस्कृति का पुनरुत्थान करो !
यज्ञसंस्कृति को पुनर्जीवित करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी !
मुंबई में ‘शंखनाद महोत्सव’ करने समान ही फल श्री राजमातंगी महायज्ञ से प्राप्त हुआ है !
१२ ज्योतिर्लिंगों में प्रथम मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य अंश सनातन संस्था को अर्पित !
साधको, शब्दशक्ति के माध्यम से संदेह फैलाने हेतु सक्रिय सातवें पाताल की बडी अनिष्ट शक्तियों की चाल पहचानकर साधना बढाओ !
राजमातंगी देवी की उपासना का कला की दृष्टि से महत्त्व