
‘प्रसार के अधिकांश साधक पारिवारिक दायित्व संभालते हुए धर्मप्रसार की सेवा करते हैं । जिस समय वे घर में रहते हैं, उस समय कुछ साधक सेवा के संदर्भ में उन्हें भ्रमणभाष पर संपर्क करते हैं तथा सेवा के संदर्भ में बातें करते हैं । इससे घर का कार्य करते समय बाधाएं आती हैं । इससे परिवारवालों को कष्ट हो सकते हैं । साथ ही कार्यालय में कार्य करते समय तथा व्यवसाय करनेवाले साधकों को भी इस प्रकार की बाधाएं आ सकती हैं । यह टालने के लिए प्रसार में रहनेवाले साधक अपना उपलब्ध समय सूचित करें । आश्रम में रहनेवाले साधक भी ‘घर में अपने परिवारवालों को किस समय पर संपर्क करें ? यह सूचित करें !’
– श्रीसत्शक्ति (श्रीमती बिंदा सिंगबाळ, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा । (८.१०.२०२२)
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के आध्यात्मिक स्तर के अनुसार, उनके विभिन्न समय के छायाचित्र से उनके सगुण-निर्गुण स्पंदनों का सद्गुरु डॉ. मुकुल गाडगीळजी द्वारा किया अभ्यास
अधिवक्ता रामदास केसरकर द्वारा प.पू. डॉक्टरजी का द्रष्टापन अनुभव करना !
‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का वाक्य ब्रह्मवाक्य होता है’, इसकी १८ वर्ष उपरांत हुई प्रतीति !