
‘प्रसार के अधिकांश साधक पारिवारिक दायित्व संभालते हुए धर्मप्रसार की सेवा करते हैं । जिस समय वे घर में रहते हैं, उस समय कुछ साधक सेवा के संदर्भ में उन्हें भ्रमणभाष पर संपर्क करते हैं तथा सेवा के संदर्भ में बातें करते हैं । इससे घर का कार्य करते समय बाधाएं आती हैं । इससे परिवारवालों को कष्ट हो सकते हैं । साथ ही कार्यालय में कार्य करते समय तथा व्यवसाय करनेवाले साधकों को भी इस प्रकार की बाधाएं आ सकती हैं । यह टालने के लिए प्रसार में रहनेवाले साधक अपना उपलब्ध समय सूचित करें । आश्रम में रहनेवाले साधक भी ‘घर में अपने परिवारवालों को किस समय पर संपर्क करें ? यह सूचित करें !’
– श्रीसत्शक्ति (श्रीमती बिंदा सिंगबाळ, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा । (८.१०.२०२२)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?
सनातन आश्रम, रामनाथी के भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ ‘आयुष्य होम’ !
साधकों को स्वभावदोष एवं अहं के निर्मूलन की प्रक्रिया सिखाकर स्वसूचनाओं के द्वारा स्वभावदोषों पर विजय प्राप्त करने का मार्गदर्शन करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी !