दक्षिण भारत में हिन्दी की कोई गिनती ही नहीं ,यह बारंबार दिखाई देता है । इसके लिए केंद्र सरकार ने देशभर में देवभाषा संस्कृत को प्रधानता देने के लिए प्रयास किया, तो देश में कोई भी भाषा विवाद शेष नहीं रहेगा ! – संपादक

चेन्नई – मद्रास उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के समय कहा, ‘राज्य में पहले से ही तमिल और अंग्रेजी पढाई जा रही है । विद्यालय पाठ्यक्रम में तीसरी भाषा के रुप में हिन्दी का समावेश करने में क्या परेशानी है ? यदि किसी को हिन्दी नहीं आती होगी, तो उसे उत्तरभारत में नौकरी मिलने में अनेक परेशानियां आ सकती हैं ।’ ऐसा कहते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने संबंधित संस्थाओं को ८ सप्ताह में इस विषय पर उत्तर देने के लिए कहा है ।
What harm will learning Hindi do? Madras high court asks Tamil Nadu govt
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— The Times Of India (@timesofindia) January 26, 2022
इस समय महाधिवक्ता आर. षण्मुगासुंदरम ने राज्य सरकार की ओर से बोलते हुए कहा, ‘राज्य का प्रत्येक व्यक्ति हिन्दी सीखने के लिए स्वतंत्र है । हिन्दी सिखाने वाली संंस्थाओं की ओर से हिन्दी सीख सकते हैं ।’ इसपर न्यायालय ने कहा कि, ‘सीखना’ और ‘सिखाने’ में अंतर है ।
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