सरकारी सर्वेक्षण के अनुसार सभी मुकदमों का निर्णय आने में लगेंगे ३२४ वर्ष !
इस गति से मुकदमों का निर्णय निकलता होगा, तो जनता को न्याय मिलेगा क्या ? यह नागरिकों पर अन्याय नहीं है क्या ? – संपादक

मुंबई – देश में कुल प्रलंबित मुकदमों की संख्या ३ करोड ६० लाख है । वर्तमान में देश के २४ उच्च न्यायालयों में लगभग ५६ लाख मुकदमे प्रलंबित हैं । देश के सबसे बडे इलाहाबाद उच्च न्यायालय में ४२ सहस्र ७६४ मुकदमे ३० वर्ष से अधिक पुराने हैं । देश में कोलकाता उच्च न्यायालय सबसे अधिक प्रलंबित मुकदमों के लिए जाना जाता है । इस उच्च न्यायालय में वर्तमान में लगभग २ लाख २४ सहस्र मुकदमे प्रलंबित है । इन मुकदमों में एक मुकदमा २२१ वर्ष से अधिक समय से इस न्यायालय में प्रलंबित है । यह मुकदमा देश का सबसे पुराना प्रलंबित मुकदमा माना जाता है ।
१. सरकार द्वारा किए एक सर्वेक्षण के अनुसार, यदि वर्तमान गति से मुकदमों का निर्णय निकलेगा, तो सभी मुकदमों का निर्णय निकलने में ३२४ वर्षों का समय लगेगा ।
२. ‘राष्ट्रीय न्यायिक जानकारी ग्रीड’ के (‘एजेडीजी’ के) आंकडों के अनुसार, देश भर के१७ सहस्र जिला न्यायालयों में ८९ सहस्र मुकदमे प्रलंबित होकर वे ३० वर्षों से अधिक पुराने हैं । कनिष्ठ न्यायालयों में भी १४० मुकदमे ६० वर्षों से अधिक पुराने हैं ।
३. चैनलों के वृत्तानुसार, कोलकाता उच्च न्यायालय के प्रकरण क्रमांक ‘एएस्टी/१/१८००’ यह देश का सबसे पुराना मुकदमा माना जाता है । २२१ वर्ष पहले यह प्रकरण वर्ष १८०० में सर्वप्रथम एक कनिष्ठ न्यायालय में प्रविष्ट किया गया था । इस मुकदमे की अंतिम सुनवाई २० नवंबर २०१८ में कोलकाता उच्च न्यायालय में हुई थी । इस मुकदमे की धारिका (फाइल्स) कनिष्ठ न्यायालय में लगभग १७० वर्ष प्रलंबित थी । इसकी सुनवाई तेज गति से हो, इस उद्देश्य से १ जनवरी १९७० के दिन कोलकाता उच्च न्यायालय में इसे प्रविष्ट किया गया; परंतु उच्च न्यायालय में भी यह प्रकरण पिछले ५१ वर्षों से केवल तारीखों में फंसा है ।
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