| ८ मार्च से १९ अप्रैल २०२१ की कालावधि में हरिद्वार महाकुंभ मेले में सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा व्यापक धर्मप्रसार किया गया । वास्तव में महाकुंभ मेले का प्रथम स्नान महाशिवरात्रि अर्थात ११ मार्च को था; परंतु उत्तराखंड शासन ने घोषित किया कि ‘कोरोना महामारी की पृष्ठभूमि पर कुंभमेला १ से २८ अप्रैल की कालावधि में होगा ।’ वास्तव में कोरोना का परिणाम बढने के कारण १७ अप्रैल से हरिद्वार में ‘जनता कर्फ्यू’ लगाया गया; परिणास्वरूप १७ अप्रैल से एक प्रकार से महाकुंभ मेले का समापन हुआ । महाकुंभ मेले की कालावधि अत्यल्प होते हुए भी सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा बडी मात्रा में किस प्रकार धर्मप्रसार किया गया ?, यह इस लेख में देखें… |

अध्यात्म का प्रसार करनेवाली चलती-फिरती ग्रंथ-प्रदर्शनी द्वारा हुआ ज्ञानशक्ति का प्रसार !
सरकारी कुंभमेला १ अप्रैल से आरंभ हुआ, तो भी उससे पूर्व अर्थात ८ मार्च से ही हरिद्वार के जिज्ञासुओं में अध्यात्म का प्रसार हो, इस हेतु नगर के हरकी पौडी, भीमगौडा, भूपतवाला, हरिपुर, कनखल, मायापुर, मनसादेवी, चंडीदेवी, अरविंद आश्रम इत्यादि प्रमुख स्थानों पर सनातन संस्था द्वारा चलती-फिरती ग्रंथ-प्रदर्शनी लगाई गई । कुंभमेले की कालावधि में एक ही शहर में एक ही दिन १० स्थानों पर ग्रंथ-प्रदर्शनी द्वारा अध्यात्मप्रसार होना, यह सनातन के इतिहास की एक विशेषतापूर्ण घटना थी ।
ऋषिकेश में भी ‘अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव’ की कालावधि में २ दिन ग्रंथ-प्रदर्शनी लगाई गई थी । इस ग्रंथ-प्रदर्शनी की विशेषता यह थी कि वहां जिज्ञासुओं को आनंदमय जीवन हेतु साधना तथा सात्त्विक उत्पादों की जानकारी दी गई । नगर के बैरागी कैंप में लगाई गई ‘सनातन धर्मशिक्षा और हिन्दू राष्ट्र-जागृति केंद्र’ की प्रदर्शनी देखने के निमंत्रण दिए जा रहे थे । कुछ प्रदर्शनियों के स्थान पर धर्मशिक्षा देनेवाले फलक भी लगाए गए थे ।
पूरे माह लगाई गई चलती-फिरती ग्रंथ-प्रदर्शनियों का लाभ यह हुआ कि संपूर्ण हरिद्वार शहर में सनातन संस्था की ज्ञानशक्ति का प्रसार हुआ । अनेक लोग मिलने पर बताते थे, ‘‘आपके ग्रंथ हमने शहर में यहां-यहां पर देखे हैं ।’’ अंतत: उत्तराखंड शासन और कुंभमेला प्रशासन का ध्यान भी इन ग्रंथ-प्रदर्शनियों की ओर आकृष्ट हुआ । सरकार द्वारा अधिकृत रूप से प्रकाशन हेतु बनाए गए पत्रकारों के ‘कुंभवार्ता’ नामक व्हॉट्सएप गुट में सरकार द्वारा सनातन की ग्रंथ-प्रदर्शनियों के छायाचित्र सहित समाचार दिए गए । अनेक समाचारपत्रों ने उसे प्रकाशित भी किया ।
चलती-फिरती ग्रंथ-प्रदर्शनियों की एक विशेषता यह रही कि अनेक स्थानों पर पुलिस ने स्वप्रेरणा से साधकों की सहायता की । चमोली (उत्तराखंड) की एक धार्मिक यात्रा में ग्रंथ-प्रदर्शनी लगाने के लिए पुलिस के एक गुट ने संस्था को आमंत्रित किया । इस चलती-फिरती ग्रंथ-प्रदर्शनी के लिए देहली के दो बडे प्रतिष्ठानों ने कुल १२ छत्रियां अर्पण की । इसलिए ग्रंथबिक्री करनेवाले साधकों की कडकती धूप से रक्षा हुई ।
फेसबुक द्वारा ‘कुंभ जनसंवाद’अनेक लोगों को कुंभमेले में जाने की इच्छा होती है । कुछ लोग अपनी व्यस्तता के कारण, तो कुछ लोग कोरोना की स्थिति के कारण कुंभ में नहीं आ सके । जो आएं उनमें से अनेकों को कुंभक्षेत्र, गंगा, कुंभ की परंपरा के संदर्भ में अधिक जानकारी नहीं थी । सभी की यह धर्म संबंधित जिज्ञासा पूर्ण हो, इस हेतु हिन्दू जनजागृति समिति के फेसबुक पेज से प्रतिदिन ‘कुंभ जनसंवाद’ के नाम से ‘फेसबुक लाईव’ किया गया । ‘गंगा महिमा’, ‘गंगा रक्षा’, ‘अमृत स्नान’, ‘हरिद्वार तीर्थक्षेत्र का महत्त्व’, ‘कुंभ और साधु समाज’, ‘कुंभ की अव्यवस्था’ ऐसे प्रासंगिक विषयों सहित ‘मंदिर सरकारीकरण’, ‘धर्मांतरण’, ‘हिन्दू राष्ट्र’, ऐसे अनेक विषय इस फेसबुक लाईव के माध्यम से लोगों तक पहुंचाए गए । कुंभ के संदर्भ में फेसबुक लाईव प्रत्यक्ष घटनास्थल से होने के कारण अनेकों को कुंभ अनुभव करने का आनंद प्राप्त हुआ । |
राष्ट्र-धर्म संबंधी प्रवचनों में सहभाग
कोरोना के कारण कथा-प्रवचनों पर विशेष प्रतिबंध थे, तो भी हिन्दू जनजागृति समिति को कुछ स्थानों पर विषय प्रस्तुत करने का अवसर मिला । शदाणी भक्त निवास में सिंधी समाज हेतु आयोजित सम्मेलन में समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी ने मार्गदर्शन किया । भागीरथी महाविद्यालय के आमंत्रण अनुसार वहां के १ सहस्र से अधिक विद्यार्थियों से सद्गुरु डॉ. पिंगळेजी ने वार्तालाप किया । आचार्य विपिन शर्माजी ने कुंभ में ‘भूमि दिव्य ग्राम शिविर’ के माध्यम से प्रतिदिन विभिन्न विषयों पर जागृति करनेवाले कार्यक्रमों का आयोजन किया था । साधक उन्हें मिलने गए, उस समय उनके ‘आयुर्वेद कुंभ’ के अंतर्गत कार्यक्रम का आरंभ होनेवाला था । उन्होेंने त्वरित श्री. आनंद जाखोटिया को व्यासपीठ पर बुलाकर उस विषय पर उद्बोधन करने के लिए कहा । अनेक स्थानों पर प्रवचनों के निमंत्रण थे; परंतु कोरोना के बढते संक्रमण के कारण यह प्रवचन लेना संभव नहीं हुआ ।
सनातन संस्था के ग्रंथों का लोकार्पण
इस कालावधि में परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी द्वारा संकलित ‘आध्यात्मिक काव्यसंग्रह’ और ‘आपातकाल में जीवित रहने हेतु दैनिक आवश्यकताओं की व्यवस्था करें !’, इन सनातन संस्था के ग्रंथों का लोकार्पण भी संतों के करकमलों द्वारा किया गया । ग्रंथ लोकार्पण के माध्यम से ज्ञान का नया दालान कुंभक्षेत्र में खोला गया ।
संतदर्शन, संतसत्संग, कुंभस्नान के माध्यम से जीवन में अध्यात्म का प्रकाश फैले, इस हेतु १२ वर्षाें में एक बार होनेवाले कुंभपर्व में अनेक श्रद्धालु पहुंचे । कोरोना महामारी के कठिन काल में भी आवश्यक नियमों का पालन कर वे कुंभक्षेत्र में पहुंचे, इससे उनकी श्रद्धा ध्यान में आती है । ऐसे श्रद्धालुओं को धर्मशिक्षा और अध्यात्म संबंधी शंका दूर कर उन्हें प्रत्यक्ष कृति का मार्गदर्शन करने के लिए कुंभमेले के विविध उपक्रम लाभदायक सिद्ध हुए । अनेक साधक भी इस कठिन काल में धर्मसेवा हेतु १५ दिन से १ मास की कालावधि हेतु हरिद्वार में उपस्थित थे । इसलिए आगामी घनघोर आपातकाल के पूर्व समाज को धर्माचरण और साधना की दिशा देने के लिए और स्वयं की समष्टि साधना के लिए कुंभ स्वर्णिम अवसर सिद्ध हुआ । इसलिए श्रीगुरु के चरणों में कोटि-कोटि कृतज्ञता !
– श्री. चेतन राजहंस, राष्ट्रीय प्रवक्ता, सनातन संस्था और श्री. श्रीराम लुकतुके, श्री. कार्तिक साळुंखे और श्री. आनंद जाखोटिया, समन्वयक, हिन्दू जनजागृति समिति
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(और इनकी सुनिए…) ‘ वर्तमान काल में वैकुंठगमन इत्यादि कहना मुझे स्वीकार्य नहीं है, यह विशिष्ट वर्ग द्वारा थोपी गई बातें हैं । ’- Sharad Pawar
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