नई दिल्ली : देश में अब तक कोरोना से ३ लाख से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो चुकी है । ‘इंफेक्शन एंड ड्रग रेजिस्टेंस जर्नल’ में प्रकाशित एक अध्ययन में मृत्यु के कारणों की पहचान की गई । कोरोना काल में रोगियों पर एंटीबायोटिक्स का व्यापक रूप से प्रयोग किया गया, जिसके फलस्वरूप उनके शरीर में सुपर बग बन रहे हैं, जो बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण को तीव्रता से बढाते हैं । यही कारण है कि, देश में ६० प्रतिशत कोरोना रोगियों की मृत्यु हुई है । बैक्टीरिया और फंगस के कारण होने वाला ‘सुपर बग’ मृत्यु का कारण बना । शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि, जो लोग सुपर बग के शिकार नहीं हुए, उनमें से केवल ११ प्रतिशत की मृत्यु हुईं, उनमें से अधिकतर मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीडित थे ।
१. ‘इन्फेक्शन एंड ड्रग रेसिस्टंस’ द्वारा किए गए शोध में कहा गया है कि, सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया) को बेअसर करने के लिए एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जाता है ; यद्यपि जब एंटीबायोटिक औषधियों का अत्यधिक उपयोग किया जाता है, तो सूक्ष्मजीव उनके लिए प्रतिरोध क्षमता विकसित कर लेते हैं, इसलिए रोगी एंटीबायोटिक औषधियों से प्रभावित नहीं होते हैं ।
२. कोरोना की पहली लहर के समय रुग्णालयों में भर्ती कुछ रोगियों में बैक्टीरिया और फंगस संक्रमण पाया गया । ये संक्रमण औषधियों से फैलते थे जो उन्हें प्रभावहीन कर देते थे । जानकारी जुटाने के लिए शोधकर्ताओं ने देश भर के १० रुग्णालयों में भर्ती १७,५६३ रोगियों का अध्ययन किया । शोध के अनुसार, कोरोना के २८ प्रतिशत रोगी बैक्टीरिया और कवक (फंगस) से संक्रमित थे । कोरोना के रोगी सूक्ष्म जीवाणुओं द्वारा एंटीबायोटिक औषधियों के निष्प्रभ होने के कारण बैक्टीरिया और फंगस से संक्रमित हुए ।
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