
१. धनबाद (झारखंड) की साधिका श्रीमती सुजाता ठक्कर के पति श्री. किरीट ठक्कर (आयु ६४ वर्ष) का ६.५.२०२१ को निधन हो गया । उनके पश्चात परिवार में उनकी पत्नी, बेटा व बहू है । सनातन परिवार उनके दुःख में सहभागी है ।
२. मलकेरा, झारखंड की साधिका श्रीमती रिंकी कुमारी की मां श्रीमती रामदुलारी देवी (आयु ६२ वर्ष) का १०.५.२०२१ को निधन हो गया । उनके पश्चात उनके पति, १ बेटा व ३ विवाहीत बेटियां हैं । सनातन परिवार उनके दुःख में सहभागी है ।
३. दिल्ली की साधिका पूर्णिमा शर्मा की मां श्रीमती सोना देवी का (आयु ८४ वर्ष) का ४.५.२०२१ को निधन हो गया । उनके पश्चात उनकी ५ बेटीयां हैैं । सनातन परिवार उनके दुःख में सहभागी है ।
४. दिल्ली की साधिका रमा भट्टाचार्जी के पति श्री. अभय भट्टाचार्जी का (आयु ६६ वर्ष) १६.५.२०२१ को निधन हुआ । उनके पश्चात उनकी पत्नी,२ बेटीयां हैं । सनातन परिवार उनके दुःख में सहभागी है ।
५.उज्जैन के ६२ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त साधक दिवाकर कुलकर्णी (आयु ६४ वर्ष) का १.५.२०२१ को निधन हुआ । उनके पश्चात उनकी पत्नी, बेटा, बहु बेटी, जमाई, पोते-पोती हैं । सनातन परिवार उनके दुःख में सहभागी है ।
६. कानपुर की साधिका श्रीमती रमा सिंह (आयु ७२ वर्ष) का २३.४.२०२१ को निधन हो गया । उनके पश्चात परिवार में उनके पति, बेटा और ४ विवाहित बेटियां हैैं । सनातन परिवार उनके दुःख में सहभागी है ।
७. वाराणसी की साधिका श्रीमती निशि अग्रवाल के पति डॉ. रविकुमार अग्रवाल (आयु ६६ वर्ष) का २३.४.२०२१ को निधन हुआ । उनके पश्चात पत्नी, एक बेटा है । सनातन परिवार उनके दुःख में सहभागी है ।
८. वाराणसी की साधिका श्रीमती बबिता गुप्ता (आयु ५१ वर्ष) का २६.४.२०२१ को निधन हुआ । उनके पश्चात पति, २ बेटे हैं । वे अध्यात्म प्रसार के कार्य में प्रासंगिक रूप से सम्मिलित होती थीं । सनातन परिवार उनके दुःख में सहभागी है ।
अधर्म का उत्तर अधर्म से ही देने की भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा को हिंदुओं द्वारा भुला दिया जाना
नादानुसंधाननादानुसंधान
अर्पणदाताओ, गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में धर्मकार्य हेतु धन अर्पित कर गुरुतत्त्व का लाभ लें !
अधिक मास के निमित्त निरंतर धर्मप्रसार का कार्य करनेवाले सनातन के आश्रमों को अन्नदान देकरपुण्यसंचय के साथ ही आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त करें !
धर्मांधों और साम्यवादियों की दोहरी भूमिका को समझना आवश्यक है !
अधिक मास में सनातन संस्था के ग्रंथ और लघुग्रंथ अन्यों को देकर सर्वश्रेष्ठ ज्ञानदान का फल प्राप्त करें !