काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के काम में लापरवाही का परिणाम !
महंत परिवार ने दोषियों के विरुद्ध कडी कार्रवाई की मांग की !
इस तरह से हिंदुओं के आध्यात्मिक धरोहर की उपेक्षा करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करना आवश्यक है !
वाराणसी (उत्तर प्रदेश) – काशी विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र में हनुमान मंदिर के पास स्थित विशाल अक्षयवट वृक्ष, २८ अप्रैल को उखडकर गिर गया । वाराणसी महंत परिवार का आरोप है कि, प्रशासन की लापरवाही के कारण काशी विश्वनाथ मंदिर का अक्षयवट वृक्ष धराशायी हो गया । यह पेड यहां चल रहे विश्वनाथ मंदिर गलियारे कार्य क्षेत्र में स्थित था । उन्होंने घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कडी कार्रवाई की मांग की है
१. सौंदर्यीकरण का आरंभ महंत परिवार की अनुमति और विश्वनाथ मंदिर प्रशासन के लिखित आश्वासन के साथ किया गया था । इस समय, महंत परिवार ने पेड को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए थे । अधिकारियों ने भी यह आश्वासन दिया था कि ‘ध्यान रखा जाएगा’ ; किन्तु, लापरवाही के कारण पेड गिर गया । इससे ,महंत परिवार और काशी के नागरिक अप्रसन्न हो गए हैं । महंत परिवार ने कहा कि, वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलेंगे और इस संबंध में शिकायत दर्ज करेंगे ।
२. ‘एक ओर हम ऑक्सीजन के संवर्धन पर चर्चा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर हम इस प्रकार पुरातन धरोहर को नष्ट कर रहे हैं ।’ काशी विद्वत परिषद के महासचिव प्रा. रामनारायण द्विवेदी द्वारा यह वक्तव्य दिया गया है ।
अक्षय वटवृक्ष का धराशायी होना निंदनीय है ! – स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
अक्षय वटवृक्ष का गिरना निंदनीय है । इससे पहले, पूर्व गोविंदेश्वर महादेव मंदिर के पास एक पीपल का पेड काट दिया गया था ।
अक्षय वटवृक्ष का महत्व !
संपूर्ण भारत में काशी, गया और प्रयाग में अक्षय वटवृक्ष हैं । गया में इस वृक्ष के नीचे बैठकर पिंडदान किया जाता है एवं प्रयागराज में मुंडन किया जाता है, जबकि काशी में दंडी स्वामी को भोजन कराए जाने का महत्व है । इन तीन स्थानों में हनुमान जी का मंदिर है । गया में हनुमान बैठे हैं, प्रयागराज में लेटे हुए हैं और काशी में खडे हैं ।
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(और इनकी सुनिए…) ‘ वर्तमान काल में वैकुंठगमन इत्यादि कहना मुझे स्वीकार्य नहीं है, यह विशिष्ट वर्ग द्वारा थोपी गई बातें हैं । ’- Sharad Pawar
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