जांच ही नहीं करेंगे, तो मरीज कैसे मिलेंगे ? मरीज नहीं मिले, तो उपचार कैसे होगा ? और उपचार नहीं हुआ, तो व्यक्ति मरेंगे, यह देखते हुए सरकार को कठोर उपाय योजना करना आवश्यक !

लक्ष्मणपुरी (उत्तर प्रदेश) – उत्तर प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या बढ रही है । सरकारी लैब पर भार देखते हुए राज्य की निजी लैब में कोरोना की जांच करने की अनुमति दी गई है; लेकिन ऐसा दिखाई दे रहा है कि लक्ष्मणपुरी शहर की अनेक लैबों में जांच नहीं हो रही जिसका वृत्त ‘नवभारत टाइम्स’ ने दिया है ।
१. निजी लैब में जांच न होने से सरकारी अस्पतालों के सामने जांच के लिए कतारें दिख रही हैं । काम का तनाव बढने के कारण स्वास्थ्य विभाग द्वारा घरों से नमूने जमा करने का अभियान बंद किया गया है । इस कारण अनेक बूढे व्यक्ति, बीमार और गर्भवती महिलाओं को कोरोना की जांच करने के लिए बडी मुश्किलों का सामना करना पड रहा है । समय पर जांच न होने से और उस कारण सही उपचार न मिलने से अनेकों की मृत्यु हो रही है ।
२. राज्य शासन की ओर से आर.टी.-पी.सी.आर. जांच के लिए ९०० रुपये निर्धारित किए हैं । अनेक निजी लैब की ओर से, यह शुल्क कम है, ऐसा कारण बताया जा रहा है । कोरोना महामारी के समय लोग काम करने से मना कर रहे हैं, इस कारण उन्हें अधिक वेतन देना पड रहा है ।
३. शहर की कितनी निजी लैब में कोरोना की जांच चालू है और कितने में नही, इसकी सूची या जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय भी नहीं दे सका । ‘नवभारत टाइम्स’ ने निजी लैब से सीधे संपर्क करने का प्रयास भी किया; परन्तु सभी की ओर से ‘हमारे यहां कोरोना की जांच बंद है’, ऐसे उत्तर दिए गए ।
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