मंदिर सरकार के कब्जे से मुक्त करने के लिए संतों को आंदोलन चलाना पड रहा है, यह हिंदूओं के लिए लज्जास्पद ! केवल तमिलनाडु ही नहीं, तो भारत के सभी मंदिर सरकारीकण से मुक्त करना, यह हिंदूओं का धर्म कर्तव्य होकर हिंदूओं को इसके लिए पूर्णरुप से तैयार रहना आवश्यक !

नई दिल्ली – तमिलनाडु के सरकारीकरण हुए मंदिरों की दुर्व्यवस्था की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए सद्गुरू जग्गी वासुदेव ने १०० ट्वीट करते हुए आंदोलन चालू किया है ।
१. जग्गी वासुदेव ने कहा कि, मेरा यह आंदोलन किसी पर दबाव डालने के लिए नहीं, तो अत्यधिक तीव्र कष्ट के कारण यह आंदोलन चलाकर उसके लिए १०० ट्वीट कर रहा हूं । समाज की इस यातना की आवाज सुननी ही चाहिए । ईस्ट इंडिया कंपनी की दुर्भाग्यपूर्ण विरासत के कारण तमिलनाडु के हिंदूओं के मंदिर अभी भी सरकार के कब्जे में हैं । इस कारण वैभवशाली तमिल परंपरा का ह्रास हुआ और उसका गला घोंटा गया । एच.आर.सी.ई. के (हिंदू धार्मिक और धर्मादाय एंडोवमेंट्स विभाग के ) कब्जे में राज्य के ४४ सहस्र २२१ मंदिर हैं । १ लाख १२ सहस्र ९९९ मंदिरों में प्रतिदिन पूजा के लिए कोई राजस्व नहीं, ऐसा मद्रास उच्च न्यायालय में बताया गया ।
२. इस ट्वीट के साथ पोस्ट किए वीडियो में जग्गी वासुदेव ने कहा कि, यह महान कला, तमिल संस्कृति की आत्मा, तमिल लोगों का ह्रदय, उसी प्रकार भक्तों के मूल स्रोत की ऐसी अवस्था देखकर दिल टूट जाता है । अपनी भाषा, कला और हस्तकला सभी का जतन किया गया, वह इस भक्ति के कारण । तमिल की प्रत्येक बात भक्ति में डूबी हुई है और इस भक्ति का आधार ये मंदिर हैं । आज उनको इस दयनीय अवस्था में देखकर मन को बहुत कष्ट होता है । अब इन मंदिरों को बंधन से मुक्त करने का समय आ गया है ।
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