भारत में अनेक उदाहरण सामने आए हैं, जिनमें हिन्दुओं के प्राचीन धार्मिक स्थल तथा मंदिर आदि की उपेक्षा होने के कारण वे दुरावस्था में हैं । ऐतिहासिक वस्तुओं एवं संरचनाओं के प्रति असंवेदनशील तथा गंभीरता न रखनेवाले इस विभाग को विसर्जित कर देना चाहिए तथा संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कडी कार्रवाई की जानी चाहिए !

भुवनेश्वर (ओडिशा) – यहां के लिंगराज मंदिर के निकट स्थित शिवतीर्थ मठ के परिसर की खुदाई करते समय ४ स्तंभ मिले थे; उन्हें उठाकर रखते समय उनमें से २ स्तंभ टूट गए, वरिष्ठ पत्रकार एवं हिन्दुत्ववादी श्री अनिल धीर ने यह सूचना दी । इनमें से प्रत्येक स्तंभ २० फीट लंबा तथा १५ टन वजन का है, ऐसे स्तंभ विरले होते हैं ।
जब ये स्तंभ मिले थे, तभी श्री धीर ने संबंधित विभाग को उसकी सूचना दी तथा इन स्तंभों को सुरक्षित रखने का अनुरोध किया । तदनुसार, विभाग ने वे स्तंभ उठाने की व्यवस्था की; परंतु उनकी ढिलाई के कारण उनमें से २ स्तंभ टूट गए । (इससे पुनः एक बार दिखाई देता है कि प्राचीन वस्तुओं का जतन करने में पुरातत्व विभाग कितना दायित्वशून्य है ! – संपादक )
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(और इनकी सुनिए…) ‘ वर्तमान काल में वैकुंठगमन इत्यादि कहना मुझे स्वीकार्य नहीं है, यह विशिष्ट वर्ग द्वारा थोपी गई बातें हैं । ’- Sharad Pawar
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