पाकिस्तान में सैकड़ों कट्टरपंथियों ने ’अल्ला-हु अकबर ’ की घोषणा करते हुए हिन्दू मंदिरों को ध्वस्त कर जला दिया !

  • पुलिस और प्रशासन मूक दर्शक !

  • अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं !

  • भारत सहित विश्व का कोई भी देश पाकिस्तान में हिन्दुओं और उनके धार्मिक स्थानों की रक्षा के लिए आगे नहीं आ रहा है ! यह हिन्दुओं के लिए लज्जास्पद है !
  • केवल पाकिस्तान में ही नहीं, अपितु, पूरे विश्व में हिन्दुओं की रक्षा के लिए भारत में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना होनी चाहिए !
  • क्या भारत में कोई भी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष या राजनैतिक दल पाकिस्तान में हिन्दुओं और उनके मंदिरों की स्थिति के बारे में अपना मुंह खोलते हैं ? यही उनके पाखंड को दर्शाता है !

उक्त चित्र प्रकाशित करने का उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाएं  आहत करना नहीं है । केवल जानकारी के लिए प्रकाशित किया गया है । – संपादक

करक (पाकिस्तान) – पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के करक जिले में एक हिन्दू मंदिर में सैकड़ों कट्टरपंथियों ने तोडफोड की और आग लगा दी । यह हिन्दू विरोधी कृत्य एक मौलवी के नेतृत्व में किया गया था । इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ है । उसमें दिखाया गया है कि कैसे सैकड़ों कट्टरपंथियों ने मंदिर की दीवारों और छत को खोद कर धराशायी किया एवं मंदिर में आग लगा दी । जिला पुलिस अधिकारी, इरफान मरवत ने कहा, “भीड ने मंदिर के पुराने ढांचे को तो गिराया ही, किंतु, नये निर्माण को भी ध्वस्त कर दिया । मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है । देश भर के हिन्दू हर गुरुवार को इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं । पाकिस्तान में पहले भी इस तरह की घटनाएं हुई हैं । वही बात बार-बार हो रही है, जिसकी विश्व भर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कडी आलोचना की है ।

डेली टाइम्स के अनुसार, पाकिस्तान में सुन्नी राजनैतिक दल, देवबंदी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल द्वारा मंदिर के पास एक सभा आयोजित की गई थी । वहां आक्रामक भाषण दिए गए, तब उत्तेजित कट्टरपंथियों की भीड ने मंदिर पर आक्रमण कर दिया ।

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा रहा था !

तेरी गांव में स्थित यह प्राचीन मंदिर है । परमहंस जी महाराज की समाधि यहां १९१९ में बनाई गई थी । १९९७ में, एक मुफ्ती के आदेश पर, कट्टरपंथियों ने मंदिर पर आक्रमण कर तोड-फोड की थी । तब से हिन्दू, मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए कानूनी लडाई लड रहे हैं । २०१५ में सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के जीर्णोद्धार और विस्तार की अनुमति दी थी । उसके अनुसार, जब यहां निर्माण चल रहा था, तभी कट्टरपंथियों ने आक्रमण किया ।

पुलिस और प्रशासन मूक दर्शक !

१. कराची के पत्रकार, मुबाशिर जैदी ने ट्वीट किया, “स्थानीय मौलवियों के नेतृत्व में मंदिर को ढहा दिया गया । स्थानीय हिन्दुओं ने इस मंदिर के निर्माण के लिए प्रशासन की पूर्व अनुमति ली थी ; इसपर भी मंदिर को ढहाए जाने के दौरान पुलिस और प्रशासन मूकदर्शक बना रहा ।’

२. लंदन की मानवाधिकार कार्यकर्ता, शमा जुनैजो ने कहा, “यह एक नया पाकिस्तान है । यह शर्मनाक दिन है और यह कृत्य अति निंदनीय है । भीड ‘अल्ला हु अकबर’ के नारे लगा रही थी ; इसलिए पुलिस ने उन्हें नहीं रोका, जो शर्म की बात है ।”

३. मानवाधिकार कार्यकर्ता, इहतेशाम अफगान ने एक ट्वीट में कहा कि, यह इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है ।

४. पाकिस्तान के मानवीय आयोग के सचिव, लालचंद मल्ही ने इस घटना की कडी निंदा की है । ‘कुछ असामाजिक ताकतें पाकिस्तान को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं । सरकार को उन्हें शरण नहीं देनी चाहिए । उन्होंने मांग की है कि जिला प्रशासन को तुरंत मामला दर्ज कर, दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए ।’

मंदिर पर हमला दुर्भाग्यपूर्ण है ! – खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री, महमूद खान

खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री, महमूद खान ने कहा, “मंदिर पर हमला और तोड-फोड दुर्भाग्यपूर्ण है ।” (महमूद खान के मगरमच्छ के आंसू ! पाकिस्तान में नेता और राजनीतिज्ञ कभी भी हिन्दुओं के हितों की परवाह नहीं करते हैं । यही कारण है कि वहां हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहा है ! – संपादक) पेशावर में हिन्दू समुदाय के एक नेता, हारुन सरबयाल ने कहा, “इस घटना ने हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है ।”