सरकारी संस्थानों को बेचने की स्थिति आना, स्वतंत्रता से अब तक की सभी सरकारों के लिए शर्मनाक !

नई देहली – ‘एअर इंडिया’ का सरकारी हवाई संसथान यदि कोई खरीद नहीं रहा है, तो उसे स्थायी रूप से बंद किया जाएगा, केंद्रीय नागरी हवाई यातायात राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी जी ने राज्यसभा में ऐसी जानकारी दी । ‘हवाई जहाज सुधार विधेयक २०२०’ राज्यसभा में प्रस्तुत करने से पहले सभागृह में उन्होंने यह बात बताई ।
आगे उन्होंने कहा, हो सके तो सरकार ये संस्थान चालू रखेगी; इस पर मात्र साठ सहस्र करोड रुपए का कर्जा है । वर्ष २०११-१२ से आज तक केंद्र सरकार ने एअर इंडिया में तीस सहस्र पांच सौ बीस करोड रुपए का भुगतान किया है । यह संस्थान बेचने पर भी सरकार को कुछ अधिक लाभ नहीं होगा । (‘एअर इंडिया’ संस्थान को भारत सरकार ने टाटा संस्थान से अपने नियंत्रण लिया था; अब सरकार को उसे ही बेचना पड रहा है । संस्थान क्यों और किसके कारण घाटे में है, जनसामान्य के सामने यह बात आनी चाहिए । सरकारी संस्थान सदा घाटे में क्यों रहती है, जनसामान्य को भी इसकी जानकारी होनी चाहिए!-संपादक) इसका निजी करण करना या उसे बंद करना दो ही पर्याय हैं ।
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