नवीनीकरण के होने पर भी अस्वच्छता के कारण माणगांव (रायगड) बस स्थानक की दयनीय स्थिति

बस स्थानक के परिसर में बिखरी अस्वच्छता

माणगांव, १० जून (वार्ता.) – रायगड जिले के माणगांव बस स्थानक का कुछ समय पूर्व ही नवीनीकरण किया गया है । विस्तृत बस स्टेशन, आधुनिक प्रकाश, पेयजल व्यवस्था, यात्रियों के बैठने की आसन व्यवस्था, पुराने निर्माण की मरम्मत, प्रतीक्षालय में नए फर्श, बैठने के लिए संगमरमर की कुर्सियां, नए बल्ब, पंखे, ‘सी.सी.टी.वी. छायाचित्र संच आदि सुविधाए अच्छी तरह उपलब्ध करवाई गई हैं; परंतु यात्रियों द्वारा की जा रही अस्वच्छता एवं यहां नियमित रूप से उचित दैनंदिन स्वच्छता न होने के कारण स्थानक का नवीनीकरण व्यर्थ जाता दिख रहा है । (अस्वच्छता करने वाले यात्रियों से कठोर आर्थिक दंड वसूला जाना चाहिए ! – संपादक)

ऐसी है स्थानक पर अस्वच्छता !

१. बस स्थानकके कचरा पात्र में कचरा डालने की जगह स्थानक परिसर में सभी जगह कचरा पडा दिखता है । पानी की खाली बोतलें, बिस्किट एवं वेफर्स के आवरण, चाय के कागजी कप, बचा हुआ भोजन स्थानक परिसर में बडे परिमाण पर बिखरे हुए मिलते हैं ।

उपहारगृह के बाहर चाय के कपों से कूडे का डब्बा भर जाने के कारण आसपास डाले गए कप

२.चाय की दुकान के बाहर कचरे का डब्बा पूरी तरह से भरा हुआ था । उसे खाली नहीं किया गया था एवं खाली बाल्टियों/पात्रों के लिए कोई अन्य थैला या व्यवस्था नहीं थी । इसलिए यात्रियों ने खाली कप कचरा पेटी के बाहर फेंक दिए ।

बस स्थानक पर बिखरी हुई खाद्य वस्तुओ की गंदगी, खाली प्लास्टिक की बोतलें

३. चाय के स्टॉल के बाहर कचरा पेटी के समीप की दीवार एवं स्थानकपर लगे फूलदानों पर पान/तंबाकू चबाने के उपरांत की थूकने के निशान एवं पिचकारियां दिख रही थीं । इससे रंग की हुई दीवारें गंदी दिख रही हैं ।

इस स्थानक की स्थिति के संबंध में ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि ने स्थानक प्राधिकरण से जब पूछा तो उन्होंने कहा, “यात्री स्वच्छता का पालन नहीं करते । कहीं भी कचरा फेंक देते हैं । उपलब्ध सुविधाओं का योग्य उपयोग नहीं करते । माणगांव मुंबई-गोवा राजमार्ग पर स्थित स्थानक है, इसलिए यहां भीड अधिक होती है । इसकी तुलना में दैनंदिन स्वच्छता कर्मचारी केवल एक है । हमने अधिक कर्मियों की मांग की है । (आधुनिक स्थानक के साथ उसे स्वच्छ रखने के लिए क्या आवश्यक संख्या में दैनंदिन स्वच्छता कर्मचारी नियुक्त नहीं किए गए ? स्थानक प्रबंधन ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया ? – संपादक)