उपस्थित लोगों ने जिहादी मानसिकता को समाप्त करने का संकल्प लिया !

‘कॉर्पोरेट जिहाद – वास्तविकता क्या है ?’ इस विशेष संवाद में वक्ताओं के स्पष्ट मार्गदर्शन से उपस्थित धर्मप्रेमियों में जागरूकता की चिंगारी जगी !

‘बेटी सुरक्षित, राष्ट्र सुरक्षित’ इस अभियान का स्मृति चिन्ह हाथ में लेकर अभियान का शुभारंभ करते हुए बाएं से सांसद प्रो. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी, श्रीमती शेफाली वैद्य एवं समिति के श्री रमेश शिंदे ।

पुणे, ४ मई (वार्ता): केंद्र सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत ‘राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो’ (एन.सी.आर.बी.अर्थात नेशनल क्राइम ब्यूरो) की प्रतिवेदन के अनुसार वर्ष २०१६ से २०२१ के बीच देशभर में ४ लाख ६५ सहस्त्र से अधिक युवतियां लापता हुई हैं । महाराष्ट्र में लापता होने वाली युवतियों की संख्या वर्ष दर वर्ष बढती दिख रही है । देशभर में बडी संख्या में लापता हो रही युवतियों की सुरक्षा के लिए ‘बेटी सुरक्षित, राष्ट्र सुरक्षित’ इस राष्ट्रव्यापी अभियान का शुभारंभ पुणे में किया गया । ‘कॉर्पोरेट जिहाद – वास्तविकता क्या है ?’ इस विशेष संवाद में मान्यवर वक्ताओं ने अभियान की विस्तृत जानकारी दी । शिवाजीनगर स्थित ‘मॉडर्न कॉलेज ऑडिटोरियम’ में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के मान्यवरों सहित ५५० से अधिक नागरिक उपस्थित रहे । अनेक धर्मप्रेमियों ने अपनी शंकाओं का समाधान करवाया एवं प्रश्नोत्तर सत्र में भाग लिया ।

कॉर्पोरेट जिहाद का विषयसंसद में उठाकर संस्थानों के लिए नियम बनाए जाएंगे ! – प्रो. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी, सांसद, भाजपा

प्रो. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी

अब ‘करो या मरो’ की स्थिति आ गई है एवं हिन्दुओं को जागरूक होना आवश्यक है । आज जो संकट हमारे समक्ष है, वह केवल कॉर्पोरेट (व्यावसायिक) क्षेत्र तक सीमित नहीं है । जहां भी अवसर प्राप्त है, वहां भारत के अस्तित्व को शक्तिहीन करने एवं देश को हानि पहुंचाने का सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है । सभी धर्मों में हिन्दू धर्म अलग एवं श्रेष्ठ है । यदि हमें अपना धर्म, संस्कृति एवं अस्तित्व संरक्षित है, तो केवल विचार से उद्देश्य साध्य नहीं होगा, अब कार्रवाई का समय आ गया है । ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ का विषय मैं आने वाले समय में संसद में उठाऊंगी ।

यदि हमें अपना धर्म संरक्षित करना है, तो प्रतिदिन मंदिर जाना होगा । हमारे प्रत्येक देवता के हाथ में शस्त्र है, इसलिए अब हिन्दुओं को भी बुद्धि के शस्त्र उपयोग करने चाहिए । ‘करो या मरो’ जैसी स्थिति आ चुकी है । हमें संगठित एवं बलशाली बनना होगा । यह संकल्प लें कि ‘हम किसी वस्तु का क्रय केवल हिन्दुओं से ही करेंगे ।’

व्यावसायिक(कॉर्पोरेट) संस्थानों में बढ़ते जिहाद को प्रतिबंधित करने के लिए, इन संस्थानों के भारत आने से पहले ही उन पर कुछ नियम लागू किए जा सकते हैं या नहीं-इस पर विचार चल रहा है । बढती घटनाओं को प्रतिबंधित करने के लिए सक्रिय होना आवश्यक है ।
‘ऑपरेशन दुर्गा’ हरियाणा सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा एवं छेडछाड प्रतिबंधित करने के लिए प्रारंभ किया गया जो विशेष पुलिस अभियान है उसी प्रकार ‘हिन्दू जनजागृति समिति’ के सहयोग से पूरे महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन दुर्गा’ चलाया जाए-ऐसा प्रस्ताव रखा गया । समिति के इस कार्य से आशा की किरण जगी है ।

जो धर्म का कार्य करेगा, धर्म उसकी रक्षा करेगा ! – श्रीमती शेफाली वैद्य, प्रसिद्ध वक्ता एवं लेखिका

श्रीमती शेफाली वैद्य

हिन्दू बहुल क्षेत्र में ‘व्यावसायिक(कॉर्पोरेट) जिहाद’ जैसे विषय पर बात करना ही लज्जास्पद है । इसका अर्थ है अन्य धर्मों को छूट एवं हिन्दुओं पर नियमों के नाम पर बंधन । हिन्दू विरोध नहीं करते, केवल सहन करते हैं, इसलिए अपराध बढते जा रहे हैं । इसे ‘ब्रोकन विंडो थ्योरी’ से समझा जा सकता है—समय पर कार्रवाई न करने से समस्या बढती जाती है । ‘लेंसकार्ट’ जैसे उदाहरणों में भी विरोध करने वाले अत्यल्प लोग होते हैं । इससे हिन्दुओं में धर्म के प्रति उदासीनता स्पष्ट होती है । जब तक ठोस विरोध नहीं होगा, तब तक यह चलता रहेगा । यह सदैव ध्यान में रखें-जो धर्म का कार्य करेगा, धर्म उसकी रक्षा करेगा ।

जिहाद की कोई सीमा नहीं, इसलिए आत्मबोध एवं शत्रुबोध आवश्यक है ! – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति

रमेश शिंदे

आज समाज में हो रही घटनाओं को देखकर लगता है कि अपराधियों के लिए अधिक कठोर दंड का प्रावधान नितांत आवश्यक है । ‘लैंड जिहाद’, ‘लव जिहाद’, ‘थूक जिहाद’ एवं दंगों के माध्यम से होनेवाला जिहाद दीर्घ काल से चल रहा है । कुछ लोग मानते हैं कि ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ नया है, किन्तु ‘गजवा-ए-हिंद’ का विचार भारत के इस्लामीकरण से जुडा बताया जाता है । ‘विजन २०४७ ’ जैसे परिपत्रों का भी उल्लेख किया गया । १९४७ का विभाजन, १९७१ में बांग्लादेश निर्माण, १९९० में कश्मीर की घटनाएं, १९९२ का अजमेर कांड, २००६ में लव जिहाद के घटित प्रकरण-इन घटनाओं जैसी अनगिनत घटनाएं जिहादों की घृणित मानसिकता को दर्शाती हैं । इसलिए आत्मबोध एवं शत्रुबोध आवश्यक है । हिन्दुओं को आपसी संवाद बढाना चाहिए । प्रत्येक माता-पिता को अपने बच्चों के साथ प्रतिदिन कम से कम १५ मिनट चर्चा करनी चाहिए ।

प्रतिक्रिया

अधिवक्ता मंगेश मुंजळेकर:
लव जिहाद के विषय पर मार्गदर्शन विभिन्न नगरों एवं गांवों में आयोजित कर लोगों को जागरूक करना आवश्यक है । अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ लेना चाहिए एवं जनजागरण में सहभागी होना चाहिए ।

झलकियां

सांसद प्रो. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी ने अपने भाषण का प्रारंभ घोषणाओं के साथ किया । कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने उत्साहित होकर नारे लगाए ।