Mumbai Press Club : ‘मुंबई प्रेस क्लब’ के ३ पत्रकारों की सदस्यता समाप्त !

कोरेगांव-भीमा दंगा प्रकरणके आरोपियों के लिए भोज आयोजित करने का प्रकरण

मुंबई – कोरेगांव-भीमा दंगा प्रकरण में प्रतिभूति पर मुक्त किए गए आरोपियों के लिए भोज आयोजित करने के आरोप में गुरबीर सिंह, बर्नाड डिमेलो एवं श्रीकांत मोडक इन तीन पत्रकारों को प्रतिष्ठित पत्रकार संगठन ‘मुंबई प्रेस क्लब’ की सदस्यता से ६ वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया गया है । सर्वोच्च न्यायालय ने कोरेगांव-भीमा प्रकरणके आरोपियों को प्रतिभूति देते समय ‘सह-आरोपियों से न मिलने’ का उपबंध रखा था, इस उपबंध का उल्लंघन करते हुए आरोपियों को ‘मुंबई प्रेस क्लब ’ में एकत्र लाने के कारण यह कार्रवाई की गई। इस प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय ने उपबंध रखा था, जिसका उल्लंघन होने से आरोपियों की प्रतिभूति भी रद्द होने की संभावना है ।

मुंबई प्रेस क्लब के भवन की छत पर १९ जनवरी २०२६ को संध्या ७ से रात्रि ११ बजे तक भोज आयोजित किया गया था । वरवरा राव, वर्नन गोंसाल्विस, अरुण परेरा, गौतम नवलखा, आनंद तेलतुंबड़े, हनी बाबू, रोना विल्सन एवं सुधीर ढवले ये कोरेगांव-भीमा दंगा प्रकरण के आरोपी इस भोजमें उपस्थित थे । यह प्रकरण उजागर होने के उपरांत मुंबई प्रेस क्लब की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राजेश मस्करेन्हास, सचिव मयुरेश गणपत्ये एवं कोषाध्यक्ष सौरभ शर्मा द्वारा जांच समिति गठित की गई ।

समिति ने सीसीटीवी चित्रण की जांच में पाया कि गुरबीर सिंह होटल कर्मियों के माध्यम से छत पर भोज की व्यवस्था करवा रहे थे, तथा भोज का १२,५०० रुपये का भुगतान भी गुरबीर सिंह द्वारा किया गया था । पंजीकरण बही में हनी बाबू, रोना विल्सन एवं अरुण परेरा को गुरबीर सिंह के अतिथि के रूप में पंजीकृत किया गया है । कुल मिलाकर भोज का आयोजन, निमंत्रण देना एवं भुगतान करना-इन सभी में गुरबीर सिंह की प्रमुख भूमिका पाई गई ।

इस प्रकरण के उपरांत मुंबई प्रेस क्लब द्वारा निष्कासित तीनों सदस्यों को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया गया था । संघ की प्रबंधन समिति की बैठक में दो-तिहाई बहुमत से इनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई ।

यह प्रकरण इतना गंभीर क्यों है !

३१ दिसंबर २०१७ को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद के उपरांत कोरेगांव-भीमा में दंगे भडके थे । इस प्रकरण के आरोपियों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या का षड्यंत्र एवं नक्सलवादी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी जैसे गंभीर आरोप हैं । इसी कारण सर्वोच्च न्यायालय ने प्रतिभूति पर मुक्त किए गए आरोपियों को एक-दूसरे से न मिलने का उपबंध रखा था । ऐसा होते हुए भी इन सभी आरोपियों को एक साथ लाकर लगभग ४ घंटे तक भोज कराना एक गंभीर प्रकरण माना जा रहा है ।

क्या महाराष्ट्र विशेष जनसुरक्षा कानून के अंतर्गत कार्रवाई होगी ?

‘मुंबई प्रेस क्लब’ ने इस गंभीर प्रकरण में आरोपियों के लिए भोज आयोजित करने वाले पत्रकारों की सदस्यता समाप्त कर दी है; किन्तु प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अपराध जांच विभाग द्वारा भी जांच किए जाने की संभावना है । नगरीय नक्सलवाद पर प्रतिबंध लगाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने ‘महाराष्ट्र विशेष जनसुरक्षा कानून’ लागू किया है । इस कानून के अंतर्गत नक्सलवादियों को गुप्त रूप से सहायता करने वालों के विरुद्ध भी कार्रवाई का प्रावधान है ।

संघ में आयोजित भोज में किन विषयों पर चर्चा हुई ? क्या वहां कोई अन्य षड्यंत्र रचा गया ? इन प्रश्नों की गहन जांच गृह विभाग से अपेक्षित है । यदि माओवादी गतिविधियों को समर्थन देने से संबंधित चर्चा हुई हो, तो इस प्रकरण में महाराष्ट्र विशेष जनसुरक्षा कानून के अंतर्गत कार्रवाई हो सकती है ।