(और इनकी सुनिए …) ‘वारकरी संप्रदाय में ‘प्रतिगामी’ विचारों की घुसपैठ हुई है’ – शरद पवार, सांसद

६० प्रतिशत वारकरियों के ‘धर्मांध’ होने का किया शोध ।

राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार

मुंबई – राजनीति में सदैव ही स्वयं के लिए सुविधाजनक भूमिका लेनेवाले राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार गुट के अध्यक्ष शरद पवार ने अब वारकरी संप्रदाय पर कीचड उछाला है । एक महिला सरकारी अधिकारियों के साहित्य सम्मेलन की स्मरणिका में लिखे लेख में उन्होंने वारकरी संप्रदाय में ‘प्रतिगामी’ विचारों की घुसपैठ होने की अप्रिय बातें की हैं । इस संप्रदाय के ६० प्रतिशत लोगों की रचना ‘धर्मांध शक्तियों’ को (उनकी दृष्टि में हिन्दुत्वनिष्ठ) बल देनेवाली है, ऐसे जातिवादी वक्तव्य देकर उन्होंने वारकरी परंपरा की अपकीर्ति करने का प्रयास किया है । ‘समता एवं प्रबोधन का संदेश देनेवाली वारकरी संप्रदाय में ऐसे विचारों में वृद्धि होना’ चिंता का विषय है’, ऐसा बोलने से भी वे नहीं भूले । (शरद पवार को कदाचित ‘आधुनिकतावादी’ कीर्तनकार एवं ‘राजनीतिक’ प्रवचनकार कहना चाहिए। उन्होंने वारकरी संप्रदाय की जो आलोचना की है, वह केवल वैचारिक नहीं है, अपितु राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है । जिस वारकरी संप्रदाय ने शतकों से ‘भेदाभेद भ्रम अमंगल’ ऐसा बोलते हुए समाज को एकत्रित रखा, उन्हें ‘प्रतिगामी’ ठहराने का साहस पवार कैसे दिखा सकते हैं ? – संपादक)

उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिकतावादी विचारों को पोषक पद्धति से रखनेवाले ४० कीर्तनकारों का संज्ञान लिया गया है तथा ‘ऐसे ही आधुनिकतावादी विचारधारावाले कीर्तनकारों की संख्या बढाना आवश्यक है’ । वारकरी संप्रदाय में महिलाओं का अभाव है । प्रबोधन के इस प्रवाह में महिलाओं का सहभाग उतना दिखाई नहीं देता, यह दुर्भाग्यजनक है । समाज के सभी घटकों का संतुलित सहभाग होना आवश्यक है । (वारकरी संप्रदाय को महिला संतों की एक बडी परंपरा प्राप्त है । ऐसा होते हुए भी ‘वारकरी संप्रदाय में महिलाओं का सहभाग नहीं है’, यह जानबूझकर दिया गया संप्रदायविरोधी वक्तव्य है ! – संपादक)

  • इफ्तार पार्टियों में जानेवाले पवार वारकरियों को ‘धर्मांध’ ठहराते हैं, यह क्षोभजनक – तुषार भोसले, प्रमुख, भाजपा आध्यात्मिक प्रकोष्ठ

  • हिन्दुत्वनिष्ठों ने वारकरी संप्रदाय का अनादर करनेवाले शरद पवार की कडी निंदा की ।

  • भाजपा एवं वारकरी संगठक आक्रामक ।

भाजपा के आध्यात्मिक प्रकोष्ठ के प्रमुख श्री. तुषार भोसले

मुंबई – इफ्तार पार्टियों में सम्मिलित होते समय सांसद शरद पवार को धर्मांधता दिखाई नहीं देती, परंतु ‘राम कृष्ण हरि’का जयघोष करनेवाले वारकरियों में उन्हें धर्मांधता क्यों दिखाई देती है ? हिन्दू धर्म एवं वारकरी संप्रदाय के प्रति नकारात्मक भूमिका लेनेवाले पवार को अब यह ‘संप्रदाय’ धर्मांध लगने लगा है । कुछ लोगों की सूची तैयार कर उससे वारकरी संप्रदाय को तोडने का प्रयास किया जा रहा है । हमारे जीवित होने तक हम ऐसे किसी भी प्रयासों को सफल नहीं होने देंगे, यह चेतावनी भाजपा के आध्यात्मिक प्रकोष्ठ के प्रमुख श्री. तुषार भोसले ने दी है ।

  • नवनाथ बन, मुख्य प्रवक्ता, भाजपा – वारकरी संप्रदाय में धर्मांधता नहीं, अपितु कुछ ‘शहरी नक्सली’ घटक घुसपैठ करने का प्रयास कर रहे हैं । इसविषय में शरद पवार शोध कर स्पष्ट करें । विठ्ठलभक्ति एवं प्रबोधन को धर्मांधता के साथ जोडना वारकरी परंपरा का बडा अनादर है ।
  • ह.भ.प. गणेश महाराज शेटे – वारकरी परंपरा सनातन धर्म का ही अभिन्न अंग है । वारकरी समाज हिन्दू धर्म पर आघात करनेवाली किसी भी बात का पूरी शक्ति के साथ विरोध करेगा ।
  • ह.भ.प. विठ्ठल पाटिल, अध्यक्ष, वारकरी साहित्य परिषद – पवारों ने जिन ४० कीर्तनकारों की सूची तैयार की है, उसे वे तुरंत सार्वजनिक करें । उससे ‘किसका कीर्तन सुनना चाहिए, किसे बुलाना चाहिए तथा किसे टालना चाहिए’, यह लोगों को ज्ञात होगा ।

संपादकीय भूमिका

  • हिन्दुओ, वारकरी संप्रदाय की पवित्रता बनाए रखने के लिए तथा इसप्रकार की राजनीतिक घुसपैठ को रोकने के लिए संगठित हों ।
  • वास्तव में देखा जाए, तो ‘आधुनिकतावाद’ की आड में छिपे हिन्दूविरोधी विचारधारा ने ही वारकरी संप्रदाय में घुसपैठ की है । वारकरी संप्रदाय को किसी से प्रमाणपत्र लेने की आवश्यकता नहीं है । यह संप्रदाय को तोडने का प्रयास है ।
  • विठ्ठलभक्ति की आत्मा तथा जिस संप्रदाय में अनेक संत हुए, वह वारकरी संप्रदाय प्रतिगामी कैसे हो सकता है ? अपने राजनीतिक दल के टुकडे होकर भी शरद पवार हिन्दू धर्म को तोडने की जातिवादी राजनीति करना नहीं छोडते ।