
(उपरोक्त चित्र प्रकाशित करके किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं है। यह चित्र सूचनार्थ प्रकाशित किया गया है। – संपादक)
कराची (पाकिस्तान) – यहां एक ऐतिहासिक भवन की दीवारों पर स्थित हिन्दू देवताओं की मूर्तियों को तोड दिया गया है । इस घटना से अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय में आक्रोश है; यद्यपि पाकिस्तान की सरकार ने इस पर मौन साध रखा है । पुलिस की ओर से भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है ।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावलपुर जिले में अल्पसंख्यक अधिकार संगठन के अध्यक्ष शिव कच्छी ने ‘एक्स’ पर लिखा कि:
१. कराची के ऐतिहासिक ‘सगन मैसन’ भवन में भगवान श्रीकृष्ण एवं गोपियों की मूर्तियों का अपमान अत्यंत निंदनीय है। यह केवल एक भवन की क्षति नहीं है, अपितु पाकिस्तान की बहुसांस्कृतिक धरोहर, धार्मिक सौहार्द एवं अल्पसंख्यक समुदायों की भावनाओं पर धर्मांध आघात है । इस लज्जास्पद घटना की कठोर निंदा की जानी चाहिए ।
२. कराची के एम.ए. जिन्ना मार्ग पर स्थित यह ऐतिहासिक भवन वर्ष १९३७ में निर्माण किया गया था एवं यह हिन्दू धार्मिक प्रतीकों की समृद्ध उपस्थिति को दर्शाती है । भगवान श्रीकृष्ण एवं गोपियों की मूर्तियों के मस्तक तोडना केवल धार्मिक अपमान नहीं, अपितु सामयिक धरोहर की भी क्षति है । संबंधित अधिकारियों को त्वरित इस प्रकरण का संज्ञान लेना चाहिए, दोषियों को बिना विलंब बंदी बना कर कठोर दंड देना चाहिए, तथा इस ऐतिहासिक भवन का शीघ्र पुनर्निर्माण कर उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, ऐसी मांग उन्होंने की ।
संपादकीय भूमिकाइतने वर्षों तक ये मूर्तियां अब तक सुरक्षित रहीं, यही तथ्य पाकिस्तान की स्थिति को देखकर आश्चर्यजनक लगता है ! ऐसी घटनाएं विश्वभर के हिन्दुओं के लिए लज्जाजनक हैं ! |
क्या बांग्लादेश सरकार बांग्लादेश को ‘हिन्दूमुक्त’ राष्ट्र बनाने का प्रयास करनेवालों की सहायता कर रही है ? – Salah Uddin Shoaib Choudhury
सशस्त्र मुसलमानों की भीड़ ने भाजपा नेता की हथौडे से की हत्या !
UP Bulldozer Action : श्री चामुण्डा मन्दिर की भूमि पर से धार्मिक स्थल का अतिक्रमण हटाया गया !
Bahraich Talaq : ससुर द्वारा बलात्कार किए जाने की बात बताते ही पति रेहान द्वारा पत्नी को तलाक !
Bharuch Jama Masjid Row : भड़ौच (गुजरात) स्थित जामा मस्जिद के भूगर्भ (तहखाने) में देवताओं की मूर्तियां प्राप्त हुईं !
(और इनकी सुनिए…) ‘श्रीराम दशरथ के पुत्र नहीं थे !’ – Prof. K.S. Bhagwan