पेडों का गला कसनेवाले ठेकेदारों पर अपराध पंजीकृत कीजिए । – ‘सुराज्य अभियान’ कि मांग

  • ‘सुराज्य अभियान’ ने विभिन्न स्थानों के प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन देकर मांग की ।

  • पेडों के इर्द-गिर्द डाला जानेवाला ‘कांक्रीट तथा उनमें कीलें ठोककर विज्ञापन लगाना, कानून के विरुद्ध कार्यों पर ‘सुराज्य अभियान’ने प्रकाश डाला ।

नागपुर में वृक्षों पर कीलें ठोककर लगाए गए विज्ञापन ।

मुंबई – शहर के २९ लाख ७५ सहस्र वृक्षों की रक्षा के लिए मुंबई नगरमहापालिका ने १ अप्रैल को ‘वृक्ष संजीवनी’ अभियान घोषित किया है । यह केवल एक दिन का ‘ऊपरी उपचार’ है तथा क्या प्रशासन इसकी ओर मात्र एक ‘इवेंट’ (औपचारिक कार्यक्रम) के रूप में देख रहा है ?, यह प्रश्न हिन्दू जनजागृति समितिप्रणित ‘सुराज्य अभियान’ की ओर से उठाया गया है । सुराज्य अभियान ने विभिन्न शहरों में सुशोभीकरण के नाम पर वृक्षों के इर्द-गिर्द डाला गया ‘कांक्रीट’, साथ ही वृक्षों में कीलें ठोककर लगाए गए विज्ञापन, इन कानूनविरोधी कार्यों के विरुद्ध आवाज उठाई है ।

अभियान ने कहा है कि यह किसी भी प्रकार की ऐच्छिक सेवा नहीं है, अपितु माननीय राष्ट्रीय हरित आयोग के आदेश के अनुसार आवश्यक अनिवार्य कानूनी कार्यवाही है । पेडों पर सहस्रों कीलें ठोककर विज्ञापन लगाना, वृक्षों के तने तक कांक्रीट बिछाकर उनका गला कसना तथा उस माध्यम से वृक्षों का प्राकृतिक विकास रोकना, यह ‘महाराष्ट्र वृक्ष संरक्षण एवं जतन अधिनियम १९७५ सहित राष्ट्रीय हरित आयोग के सुस्पष्ट आदेशों का सीधा उल्लंघन है ।

जलगांव में वृक्ष के तने तक किया गया कंक्रीटीकरण ।

इस संदर्भ में जलगांव एवं सातारा जिला प्रशासन को पहले ही ज्ञापन प्रस्तुत किए गए हैं । अब नागपुरसहित मुंबई नगरमहापालिका के महापौर एवं पालिका आयुक्त को भी ज्ञापन प्रस्तुत किए गए हैं, ऐसी जानकारी अभियान के समन्वयक श्री. अभिषेक मुरुकटे ने दी ।

‘सुराज्य अभियान’के समन्वयक श्री. अभिजित मुरुकटे ने बताया कि,

१. राज्य में वृक्षों की स्थिति अत्यंत भयावह है । केवल मुंबई में ही पेडों में ठोंकी गई १७.४३ किलो कीलें तथा १ सहस्र ४६० कानून विरोधी विज्ञापन हटाए गए हैं ।

२. वृक्षों के इर्द-गिर्द १ मीटर के स्थान को कच्चा (अनपेवड) रखने का उच्च न्यायालय का निर्देश होते हुए भी विकासकार्याें में सहस्रों पेडों के इर्द-गिर्द सीमेंट की सतह कैसे बिछाई जाती है ? जहां इतने बडे स्तर पर वृक्षसंपत्ति संकट में होते हुए भी विज्ञापनदाताओं अथवा ठेकेदारों पर प्रशासन अपराध पंजीकृत क्यों नहीं करता ?, यह चिंता का विषय है ।

३. इससे पेडों की जडों को प्राणवायु मिलना बंद होने से उनके दुर्बल होकर गिर जाने का स्तर बढा है । इसके लिए संपूर्णरूप से प्रशासनिक लापरवाही उत्तरदायी है ।

‘सुराज्य अभियान’की ये मांगें हैं !

१. हमने जो मांगें की हैं, उनमें ‘Polluter Pays’ (प्रदूषण करनेवाला ही उसका मूल्य चुकाए), इस नियम के अनुसार पेडों के इर्द-गिर्द बिछाया गया कांक्रीट, दोषी ठेकेदारों को ही अपने खर्चे से हटाना चाहिए । ऐसे ठेकेदारों को केवल नोटिस न देकर तुरंत अविश्वसनीय सूची (ब्लैकलिस्ट) में कर दिया जाए । सरकारी टेंडर में पेडों के इर्द-गिर्द स्थान खाली छोडने की शर्त अनिवार्य हो । इसका उल्लंघन होने पर ठेकेदारों के वेतन रोके जाएं ।

२. ‘वृक्ष संजीवनी’ जैसे अभियान को केवल एक शहर तक सीमित न रखकर उसे संपूर्ण महाराष्ट्र राज्य में प्रभावीरूप से चलाने के लिए राज्य सरकार तुरंत आदेश प्रसार करें ।

३. प्रशासन यह केवल एक दिन का कार्यक्रम न करके कानून का कठोर पालन करें ।

४. संपूर्ण महाराष्ट्र में वृक्ष खुली सांस ले सकें, इसप्रकार की स्थाई कानूनी व्यवस्था बनाई जाए ।

५. जब तक नियमों का उल्लंघन करनेवाली व्यावसायिक संस्थाओं एवं ठेकेदारों में कानून का भय नहीं बैठता, तब तक वृक्षसंपत्ति सुरक्षित नहीं होगी ।

संपादकीय भूमिका

  • पेडों पर अत्याचार करनेवाले ये कार्य कानूनविरोधी हैं, तो प्रशासन उसकी अनुमति कैसे देता है ? इसका अर्थ यह है कि एक तो संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को कानून का ज्ञान नहीं है अथवा वे जानबूझकर इसकी अनदेखी कर रहे हैं, इसलिए केवल ठेकेदारों पर ही नहीं, अपितु प्रशासनिक अधिकारियों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए ।
  • जो बात एक समाजहितैषी संगठन के ध्यान में आती है, वह संपूर्ण व्यवस्था तथा जानकारी हाथ में होनेवाले प्रशासन के ध्यान में कैसे नहीं आती ? पर्यावरण का विनाश न हो, ऐसा प्रशासन को क्यों नहीं लगता ।