युक्रेन ने रूस की तेलवाहक नौकाएं कीं अधिग्रहित !

नई देहली – हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की नाकेबंदी के कारण तेल परिवहन पर बडा प्रभाव पडा था । ऐसी परिस्थिति में रूस के तेल ने भारत सहित विश्व की ऊर्जा आवश्यकताओं का बडा भाग पूर्ण किया; परंतु अब रूस की तेल आपूर्ति पर भी संकट उत्पन्न हो गया है । यूक्रेन के अभी कुछ समय के आक्रमणों के कारण रूस को बड़ी क्षति हुई है । ड्रोन आक्रमणों के कारण रूस की तेलवाहिनियों को भारी हानि हुई है तथा अनेक तेलवाहक नौकाएं भी अधिग्रहित कर ली गई हैं । इसके कारण रूस की न्यूनतम ४० प्रतिशत तेल निर्यात क्षमता ठप्प हो गई है । विश्व के दूसरे सबसे बड़े तेल निर्यातक देश के लिए यह गंभीर स्थिति है ।
Global Energy Alert ⚡️
Ukraine’s strikes on Russia are now hitting nearly 40% of its oil exports – with tanker seizures and key infrastructure disruptions.
🌍 Why it matters:
Russia had become a major fallback supplier amid Strait of Hormuz tensions.Any disruption now risks… https://t.co/UKUXorHKvR pic.twitter.com/TLXOz44izj
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) March 26, 2026
निर्यात बंदरगाहों पर लक्ष्य
इस मास में यूक्रेन ने रूस की तेल संबंधी आधारभूत संरचनाओं पर ड्रोन आक्रमण तीव्र कर दिए हैं । विशेष रूप से ३ प्रमुख निर्यात बंदरगाहों को लक्ष्य बनाया गया है । ब्लैक सी (Black Sea) स्थित नोवोरोस्सिएस्क बंदरगाह , बाल्टिक सागर स्थित प्रिमोर्स्क और उस्त-लुगा बंदरगाह इसमें सम्मिलित हैं ।
रूस की हानि
रूस की लगभग २० लाख बैरल प्रतिदिन की निर्यात क्षमता बंद हो गई है । यूक्रेन के मार्ग से हंगरी तथा स्लोवाकिया जाने वाली ‘द्रुझबा’ तेलवाहिनी के कुछ भाग की आक्रमणों के कारण क्षति हुई है । आक्रमण के पश्चात नोवोरोस्सिएस्क टर्मिनल ७ लाख बैरल प्रतिदिन की क्षमता से बहुत ही कम स्तर पर कार्यरत है । यूरोप में रूस से संबंधित तेलवाहक नौकाओं के अधिग्रहित होने के कारण मरमंस्क बंदरगाह से होने वाला ३ लाख बैरल प्रतिदिन का आर्कटिक तेल निर्यात रुक गया है ।
भारत पर प्रभाव
रूस से होने वाली तेल आपूर्ति कम होने पर भारत पर भी प्रभाव पडने की संभावना है । अमेरिका के प्रतिबंधों से पूर्व भारत ने पिछले वर्ष भारी मात्रा में रूस का तेल क्रय किया था । ईरान युद्ध के काल में अमेरिका द्वारा रूस के तेल पर से ३० दिनों का प्रतिबंध हटाए जाने के पश्चात भारत को बडी मात्रा में आपूर्ति प्राप्त हुई । भारत ने अगले मास हेतु ६० मिलियन बैरल रूसी कच्चे तेल का पंजीकरण किया है । आपूर्ति बाधित होने पर देश में तेल की उपलब्धता पर प्रभाव पड सकता है तथा पेट्रोल-डीजल के मूल्यों में वृद्धि होने की संभावना है ।
तेल के मूल्यों में वृद्धि
ईरान युद्ध के कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के मूल्य १०० (९ सहस्र ४०० रुपये) डॉलर प्रति बैरल के पार चले गए हैं । अमेरिकी डब्ल्यू.टी.आई. तेल के मूल्यों में भी लगभग २ प्रतिशत की वृद्धि होकर वे ९२ डॉलर प्रति बैरल के ऊपर थे । रूस की अर्थव्यवस्था में तेल से होने वाली आय ही मुख्य आधार है ।
संपादकीय भूमिकाहॉर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प के रूप में रूस से अनेक देशों को तेल प्राप्त होने लगा था; परंतु यदि यूक्रेन के आक्रमणों के कारण इस तेल की आपूर्ति पर प्रतिबंध लग रहे हैं, तो यह विश्व के लिए बड़ा संकट है तथा भारत को भी इसे गंभीरता से देखना आवश्यक है ! |
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