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(हिजाब का अर्थ : मुस्लिम महिलाओं के सिर एवं गर्दन को ढकने वाला वस्त्र)

कोलकाता (बंगाल) – परीक्षा में नकल (कॉपी) करने के संदेह में अंग्रेजी विषय की प्रोफेसर शाश्वती हलदर द्वारा एक मुस्लिम छात्रा को हिजाब हटाने के लिए कहने की घटना यहां के जादवपुर विश्वविद्यालय में २२ दिसंबर २०२५ को हुई थी । इस घटना के उपरांत ‘स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (SFI) नामक छात्र संगठन ने दीक्षांत समारोह के समय मंच पर चढकर प्रोफेसर पर ‘इस्लाम विरोधी’ आचरण का आरोप लगाया तथा उन्हें पद से हटाने की मांग की ।
अल्पसंख्यक आयोग का हस्तक्षेप
इस प्रकरण की जांच के लिए बंगाल अल्पसंख्यक आयोग के ६ सदस्यीय दल ने ३० दिसंबर को विश्वविद्यालय का दौरा किया । दल ने कुलपति, पंजीकरण अधिकारी एवं छात्र प्रतिनिधियों से चर्चा की । आयोग के अध्यक्ष इमरान अहमद ने छात्रा को हिजाब हटाने के लिए विवश करना ‘अनुचित एवं अस्वीकार्य’ बताया । उन्होंने इस प्रकरण में सम्मिलित प्रोफेसर शाश्वती हलदर को सेवा से निष्कासित करने की भी मांग की ।
विश्वविद्यालय समिति की भूमिका
विवाद की जांच के लिए जादवपुर विश्वविद्यालय ने एक ५ सदस्यीय समिति का गठन किया । ६ जनवरी को समिति ने छात्रा एवं अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसरों के बयान प्रविष्ट किए । बयान प्रविष्ट होने के पश्चात समिति की अध्यक्षा सैयद तनवी नसरीन ने प्रोफेसर को पद से हटाने की मांग की । तथापि, समिति के एक सदस्य काजी मूम अख्तर (जो कार्यकारी परिषद में कुलाधिपति के नामित सदस्य भी हैं) ने इस मांग का विरोध किया । उन्होंने तर्क दिया कि ‘जांच पूरी होने से पहले प्रोफेसर को हटाना उनका अपमान होगा तथा इससे समाज में अनुचित संदेश जाएगा’ ।अंततः, जांच पूरी होने तक प्रोफेसर शाश्वती हलदर को ७ जनवरी से ३० जनवरी २०२६ तक की अवधि के लिए अनिवार्य छुट्टी (Forced Leave) पर भेज दिया गया है । प्रोफेसर शाश्वती हलदर ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया है कि, ‘‘मैं केवल अपना कर्तव्य निभा रही थी (नकल रोकने के लिए) ।’’
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