
सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) – यहां १४ दिसंबर को बॉन्डी समुद्र तट पर यहूदियों के हनुक्का त्योहार के समय हुए जिहादी आतंकवादी आक्रमण में मारे गए लोगों की संख्या १६ हो गई है । इसमें १० वर्ष आयु की एक लडकी एवं इजरायल का एक नागरिक भी सम्मिलित है । साथ ही ४५ लोग घायल भी हुए हैं । साजिद अक्रम (आयु ५० वर्ष) तथा नवीद अक्रम (आयु २४ वर्ष) इन पिता-पुत्रों ने गोलीबारी करते हुए यह आक्रमण किया । पुलिस की गोलीबारी में साजिद मारा गया, जबकि नवीद घायल हुआ है । ये दोनों पाकिस्तानी मूल के हैं । इस आक्रमण के उपरांत मेलबर्न में आयोजित होने वाला हनुक्का उत्सव निरस्त कर दिया गया है । ऑस्ट्रेलिया में अनुमानतः १ लाख २० सहस्र यहूदी लोग रहते हैं । उनमें से अनुमानतः ६० सहस्र यहूदी मेलबर्न शहर में रहते हैं ।
साजिद २७ वर्ष पूर्व पाकिस्तान से ऑस्ट्रेलिया आया तथा यहां किराये के कमरे में रहने लगा । यहां उसने विवाह किया एवं वह फल बेचने का व्यवसाय करने लगा था । उसका बेटा नवीद का जन्म ऑस्ट्रेलिया में ही हुआ । ‘क्या साजिद का किसी आतंकवादी संगठनों से संबंध था ? इसके पीछे और कौन हैं ?’ आदि बातों की जांच पुलिस कर रही है । वर्ष २०१९ में पुलिस ने संदेह के आधार पर नवीद की ६ महीने तक जांच की थी; परंतु उसमें वह संकटकारी नहीं पाया गया था ।
लाइसेंस वाली बंदूक द्वारा गोलीबारी
पुलिस के अनुसार साजिद अक्रम के पास लाइसेंस वाली बंदूक थी, जिसका उपयोग वह शिकार के लिए करता था । वह एक गन क्लब का सदस्य था तथा राज्य के कानून के अनुसार उसके पास लाइसेंस था । उसके पास कानूनी रूप से ६ बंदूकें थीं । गोलीबारी करने निकलने से पहले इन दोनों ने परिवार को बताया था कि, वे मछली पकडने जा रहे हैं ।
ऑस्ट्रेलिया की सरकार को पहले ही सतर्क किया गया था ! – इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू
नेतन्याहू ने बताया कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी; परंतु ऑस्ट्रेलिया सरकार ने कुछ नहीं किया, जिसके परिणामस्वरूप यह भयानक आक्रमण हुआ । ऑस्ट्रेलिया ने फिलिस्तीन को मान्यता देने के उपरांत १७ अगस्त को पत्र लिखकर प्रधानमंत्री अल्बानीज को इसकी जानकारी दी थी । इसमें कहा गया था, ‘सरकार की नीतियां देश में यहूदी-विरोधी भावनाओं को प्रोत्साहन दे रही हैं । फिलिस्तीन को मान्यता देना, यह कदम यहूदी-विरोधी आग में घी डालने जैसा है । इससे आतंकवादियों को प्रोत्साहन मिलता है तथा ऑस्ट्रेलिया में यहूदियों के विरुद्ध द्वेष फैलता है । गाजा युद्ध के पश्चात (अक्टूबर २०२३ से) ऑस्ट्रेलिया में यहूदी-विरोधी आक्रमणों में वृद्धि हुई; परंतु सरकार ने उसे रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए । वे इसे सरकार की दुर्बलता मानते हैं ।’
संपादकीय भूमिका
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