पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी अविनाश धर्माधिकारी ने सत्य उजागर किया !
(गजवा-ए-हिंद का अर्थ है भारत के इस्लामीकरण के लिए घोषित युद्ध)

मुंबई – भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी अविनाश धर्माधिकारी को मुंबई-पनवेल-नांदेड एक्सप्रेस के एक वातानुकूलित डिब्बे के शौचालय की दीवार पर ‘गजवा-ए-हिंद २०४७ ‘ लिखा हुआ मिला । उन्होंने ‘फेसबुक’ पर संदेश लिखकर इस घटना को उजागर किया । उन्होंने कहा कि यह घटना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है ।

उन्होंने लिखा,
१. जब देश ‘विकसित भारत २०४७ ‘ के स्वप्न को साकार करने की ओर द्रुत गति से आगे बढ रहा है, ऐसी घटनाएं समाज में भ्रम और असुरक्षा निर्माण कर सकती हैं । अत: रेल प्रशासन और पुलिस को इस राष्ट्र घातक कृत्य का गहन अन्वेषण करना चाहिए । सामान्य नागरिकों को भी जागरूक होना चाहिए और ऐसी घटनाओं के विरुद्ध शासन एवं समाज को त्वरित सतर्क रहना चाहिए ।
२. ‘उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत ।’ (उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए) आइए, देश की एकता और समृद्धि के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एकजुट हों । भारत माता की जय, समर्थ भारत, श्रेष्ठ भारत !
अपने संदेश में उन्होंने रेल प्रशासन से पूछा, ‘क्या ऐसी बातों की पुष्टि होगी ? समाज को इसमें क्या भूमिका निभानी चाहिए ?’
संपादकीय भूमिका
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