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नई देहली – अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जैसा सार्वजनिक रूप से विदेश नीति चलाने वाला अमेरिकी राष्ट्रपति मैंने कभी भी नहीं देखा । यह बदलाव केवल भारत तक ही सीमित नहीं है । राष्ट्रपति ट्रम्प का दुनिया से व्यवहार करने का और यहां तक कि अपने ही देश से व्यवहार करने का तरीका पारंपरिक रूढ़िवादी पद्धति से बिल्कुल अलग है । यह बड़ा परिवर्तन है । केवल व्यापार के लिए आयात शुल्क लगाना सामान्य है, किन्तु व्यापार से अतिरिक्त कारणों पर शुल्क लगाना उचित नहीं है, ऐसा प्रहार भारत के विदेशमंत्री डॉ. एस जयशंकर ने किया । ट्रम्प ने भारत पर ५० प्रतिशत आयात कर लगाने पर विदेशमंत्री ने सीधे ट्रम्प को सुनाया है । वे एक कार्यक्रम में बोल रहे थे । भारत रूस से बडी मात्रा में तेल आयात कर रहा है जिससे रूस को यूक्रेन के विरोध में युद्ध करने के लिए धन प्राप्त हो रहा है, ऐसा सारहीन आरोप लगाकर ट्रम्प ने भारत पर ५० प्रतिशत कर लगाया है ।
विदेशमंत्री जयशंकर द्वारा रखे गए महत्वपूर्ण सूत्र ।
१. पाकिस्तान पर डॉ. जयशंकर का ट्रम्प को उत्तर ।
भारत ने पाकिस्तान के संदर्भ में कभी किसी की भी मध्यस्थता स्वीकार नहीं की । पाकिस्तान के साथ मध्यस्थता के विषय में भारत की भूमिका हमेशा ही स्पष्ट रही है और वैसी ही रहेगी । वर्ष १९७० से अब तक ५० वर्षों में हमने कभी किसी की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की । डॉ. जयशंकर का यह वक्तव्य ट्रम्प के बार-बार अधिकारपूर्वक कही गयी बातों का उत्तर है । ट्रम्प ने अनेक बार यह बात कही हैं कि उन्होंने ही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय भारत-पाक के बीच युद्धविराम करवाया ।
२. किसान और छोटे व्यापारी के हितों का रक्षण हमारी प्राथमिकता ।
जब व्यापार और किसानों के हित का प्रश्न आता है, तब हम अपनी नीतिगत स्वायत्तता का समर्थन करते हैं । उसे बनाए रखने के लिए हमें जो भी करना है, वह हम करेंगे । हमारी सरकार किसान और छोटे व्यापारी के हितों के रक्षण के लिए कटिबद्ध है । हम इस पर बहुत दृढ़ हैं । इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा ।
३. भारत द्वारा किया जाने वाला व्यापार पर दृढता –
जो लोग व्यापार का समर्थन करने वाले अमेरिका के लिए कार्य करते हैं, वे ही अन्य देशों द्वारा व्यापार करने पर आरोप लगा रहे हैं, यह बहुत हास्यास्पद है । यदि भारत का तेल अथवा परिशोधित उत्पाद क्रय करने में किसी को समस्या है, तो वे उसे क्रय ना करें। किसी को इसके लिए बाध्य नहीं किया जा रहा है । यूरोप आयात करता है, अमेरिका आयात करता है, किन्तु आपको यह पसंद नहीं है तो आप आयात ना करें ।
४. भारत रूस को अधिक व्यवसाय उपलब्ध कराना चाहता है ।
व्लादिमिर पुतिन से हुई भेंट के संदर्भ में विदेशमंत्री ने कहा कि रूस के साथ वार्षिक शिखर वार्ता हमारी परंपरा है । वर्ष के अंत में यह शिखर सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं । इस प्रकार संबंध बढ़ते हैं । मेरी चर्चा सैन्य सूत्रों को छोड़कर अन्य विषयों पर है । रक्षा मंत्री सैन्य सूत्रों पर बोलते हैं । हम रूस को अधिक व्यवसाय उपलब्ध कराना चाहते हैं ।
५. रूस-यूक्रेन संघर्ष शीघ्र ही समाप्त होना चाहिए ।
अलास्का से वापस आने के बाद वहां घटी घटनाओं के विषय में पुतिन ने अपने विचार रखे । हमारी भूमिका के विषय में हम आरंभ से ही स्पष्ट हैं कि हमें रूस-यूक्रेन संघर्ष शीघ्र समाप्त हो, ऐसा लगता है । किसी भी संघर्ष को सुलझाना, यह संबंधित पक्षों का काम है, ऐसा हमें लगता है । यह परिवर्तन लाने वाले किसी भी प्रयास का हम समर्थन करते हैं ।
६. अमेरिका के कारण चीन से संबंध अधिक मुखर हुए हैं, ऐसा नहीं ।
भारत-चीन संबंधों के विषय में विदेशमंत्री ने कहा कि अमेरिका में कुछ घटा होगा, तो तुरंत ही चीन में भी कुछ घटा है, ऐसा नहीं । भिन्न -भिन्न समस्याओं के लिए भिन्न समय सारिणी होती है । मुझे लगता है कि सब कुछ एकत्र करके विशेष परिस्थिति को एक ही प्रतिक्रिया से हल करने का प्रयास करना, यह एक भूल है । आज निश्चित ही एक वैश्विक परिस्थिति है । मैं आपको यह समझाना चाहता हूं कि यह एक विकास है । उस संबंध का एक प्रवाह है, परंतु इस संबंध को इतना विशेष मत बनाइए । यह वास्तविक नहीं है ।
७. आत्मनिर्भरता पर जोर देने का कारण स्पष्ट किया ।
हाल के अनुभव ने हमें सिखाया है कि किसी एक देश की किसी एक आपूर्ति शृंखला या स्रोत पर अधिक निर्भर नहीं रहना चाहिए । किसी एक बाजार पर निर्भर मत रहो । यह निर्भरता स्रोत से उत्पादन तक ही नहीं, बल्कि उत्पादन से बाजार तक भी है । इसका अर्थ है कि आपको विविधता लानी होगी । सरकार का एक निरंतर संदेश है कि हमें अपने घर में ही अधिक काम करना चाहिए । यह कठिन है, साथ ही जटिल भी है । इसके लिए अलग प्रकार के प्रयासों की आवश्यकता है । इसी कारण आत्मनिर्भरता पर जोर दिया जा रहा है ।
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