
वॉशिंगटन (अमेरिका) – व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी स्टीफन मिलर ने जानकारी दी कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि, भारत का रूस से तेल खरीदकर युद्ध के लिए धन उपलब्ध कराना जारी रखना स्वीकार नहीं है । स्टीफन मिलर ने आगे कहा कि ट्रम्प भारत के साथ एक अटूट संबंध चाहते हैं । भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं ट्रम्प के बीच ऐसा ही संबंध है; परंतु, रूस के साथ भारत के व्यापार के संदर्भ में पुनर्विचार की आवश्यकता है । साथ ही, भारत द्वारा रूस को युद्ध के लिए दिए जा रहे वित्तपोषण पर एक यथार्थवादी दृष्टिकोण रखने की आवश्यकता है । हम यूक्रेन में शांति स्थापित करना चाहते हैं । इसमें ट्रम्प सभी मित्र राष्ट्रों से सहयोग की अपेक्षा करते हैं ।
क्या है स्थिति ?
भारत, चीन एवं अमेरिका के उपरांत कच्चे तेल का आयात करनेवाला विश्व का तीसरा सबसे बडा देश है । साथ ही, भारत रूस से तेल आयात करने वाला दूसरा सबसे बडा ग्राहक है । यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के पश्चात, कई पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए । उन्होंने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया; परंतु, इस युद्ध के उपरांत भारत ने रूस से तेल क्रय करना ०.२ प्रतिशत से बढाकर ३५-४० प्रतिशत कर दिया । विशेष रूप से, पिछले साढे तीन वर्षों से भारत को रूस से कम दरों पर तेल मिल रहा है । यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है, तो उसे अन्य देशों से तेल खरीदना पडेगा । इस के लिए भारत को ९ से ११ अरब डॉलर (७५ से ९१ सहस्र (हजार) करोड रुपये) की अतिरिक्त राशि चुकानी पड सकती है ।
संपादकीय भूमिकाअमेरिका को भारत को यह नहीं सिखाना चाहिए कि उसे क्या करना चाहिए तथा क्या नहीं करना चाहिए ! जब ट्रम्प से पहले बाइडेन सरकार ने इस पर आपत्ति नहीं उठाई, तो ट्रम्प सरकार को यह अनावश्यक हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए ? |
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