असम में ९ लाख ५७ सहस्त्र एकड भूमि बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों के अवैध आधिपत्य में है ! – Himanta Biswa Sarma

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा दी गई जानकारी

हिमंत बिस्वा सरमा

गौहाटी (असम) – असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उजागर किया है कि असम में अनुमानित २९ लाख बीघा भूमि(अर्थात लगभग ९ लाख ५७ सहस्त्र एकड भूमि) बांग्लादेशी घुसपैठियों एवं बंगाली मुसलमानों के अवैध आधिपत्य में है । इस अवसर पर मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, “वर्ष २०२१ में राज्य में भा.ज.पा. सरकार के सत्ता में आने के उपरांत से इस भूमि को मुक्त कराने के लिए एक विशेष अभियान चलाया गया है एवं इसे रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा रहा है ।” वे दरांग जिले में गोरुखुटी बहुउद्देशीय कृषि परियोजना की चौथी वर्षगांठ पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे । मुख्यमंत्री सरमा ने बताया, “दरांग में अब तक ७७ सहस्त्र ४२० बीघा भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई जा चुकी है । इसमें से अधिकांश अतिक्रमण बंगाली मुसलमानों ने किया था ।” (कुछ दिन पूर्व, जमीयत उलेमा-ए-हिंद संगठन ने असम के ग्वालपाडा जिले में इस तरह के अभियान का कडा विरोध किया था एवं कहा कि इसमें मुसलमानों को लक्ष्य बनाया गया है । इसलिए, बांग्लादेशी घुसपैठियों को बांग्लादेश भेजते समय, ऐसे घुसपैठिया-प्रेमी संगठनों के सदस्यों को भी स्थायी रूप से देश से निष्कासित कर वहां भेज दिया जाना चाहिए ! – संपादक)

मुख्यमंत्री सरमा ने जानकारी देते हुए कहा,

१. दरांग जिले में अभियान के उपरांत, बोरसोला, लुमडिंग, बुरहापहाड, पाभा, बतद्रा, चापर एवं पैकन क्षेत्रों में भी इसी प्रकार के अभियान चलाए गए ।

२. गत ४ वर्षों में राज्य में १ लाख २९ सहस्त्र बीघा भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है । इस भूमिका उपयोग वन क्षेत्रों एवं स्थानीय लोगों के लिए किया जाएगा ।

३. यदि कोई यह विचार करता है कि २-३ अभियानों के उपरांत हम डरेंगे , झुकेंगे या उनकी आंखों में आंखें नहीं डालेंगे, तो वह भ्रम में है ।

४. एक समय में हम ‘शंकर-माधव’ की जगह ‘शंकर-अजान’ कहने लगे थे । अजान पीर तो अपनी जगह पर रहेंगे ही; किन्तु माधवदेव हमारे लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं । वही हमारी जाति की रक्षा कर सकते हैं । (श्रीमंत शंकरदेव एवं श्री माधवदेव असम के पूजनीय वैष्णव संत हैं । अजान पीर एक मुस्लिम पीर थे जो १७वीं शताब्दी में इराक से असम आए थे ।)

संपादकीय भूमिका

  • जब इतनी बडी भूमि पर घुसपैठियों का अवैध आधिपत्य हो रहा था, तब स्थानीय प्रशासन, पुलिस, गुप्तचर संस्थाएं एवं सर्वदलीय सरकारें क्या कर रही थीं ?
  • इस भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने में कितना संघर्ष करना पड़ेगा ? कितना समय एवं धन लगेगा ? इसके लिए उत्तरदायी लोगों को शोध कर उनके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जानी चाहिए !