Urban Naxalism: शहरी नक्सलवाद को प्रोत्साहन देनेवाले ६४ संगठन सक्रिय !

  • माओवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगानेवाला ‘महाराष्ट्र विशेष जन सुरक्षा विधेयक – २०२४’ विधान परिषद में अनुमोदित !

  • शहरी नक्सलवाद की कमर टूटेगी !

मुंबई, १२ जुलाई (वार्ता) – देश के संविधान को चुनौती देनेवाले, कट्टर वामपंथी विचारधारा वाले तथा माओवादी प्रवृत्तियों के संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के उद्देश्य से विधान परिषद में ‘महाराष्ट्र विशेष जन सुरक्षा विधेयक २०२४’ प्रस्तुत किया गया । गृह राज्य मंत्री श्री योगेश कदम ने यह विधेयक सभागृह में प्रस्तुत करते हुए उसके पीछे के कारणों तथा आवश्यकता को स्पष्ट किया । विधेयक पर गहन चर्चा के पश्चात सभापति प्रा. राम शिंदे ने इसे बहुमत से अनुमोदित होने की घोषणा की । उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी भी व्यक्ति अथवा सामान्य सरकार विरोधी आंदोलन करनेवाले के विरोध में नहीं है । यह लोकतंत्र को चुनौती देनेवाले तथा शहरी नक्सलवाद को प्रोत्साहन देनेवाले संगठनों के विरुद्ध कार्रवार्ई के लिए है । राज्य में वर्तमान में ऐसे कुल ६४ संगठन सक्रिय हैं, जिनका मूल से अंत करना आवश्यक है ।

१. श्री कदम ने ‘अवैध क्रियाकलाप प्रतिबंधक अधिनियम’ (Unlawful Activities Prevention Act अर्थात् ‘यूएपीए’) की सीमाओं को रेखांकित करते हुए बताया कि यह कानून केवल हिंसक घटनाएं होने पर ही लागू होता है ; परन्तु वर्तमान में नक्सली विचारधारा बिना हिंसा के नगरों में प्रवेश कर रही है ।
२. इस कारण उनकी विचारधारा को रोकने के लिए स्वतंत्र कानून की आवश्यकता है । प्रा. शिंदे ने ‘साईबाबा’ नामक शहरी नक्सली का उदाहरण देते हुए बताया कि केवल वैचारिक स्तर पर की गई क्रियाओं के संदर्भ में दोष सिद्ध करना ‘यूएपीए’ के अंतर्गत संभव नहीं होता ।
३. विधेयक के अनुसार प्रतिबंध लगाने से पूर्व उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, जिला न्यायालय के सेवा निवृत्त न्यायाधीश तथा सरकारी अधिवक्ता इनका समावेश रहनेवाली एक परामर्श मंडली स्थापित की जाएगी ।
४. इस मंडली के समक्ष सभी प्रमाण प्रस्तुत किए जाएंगे और उनकी अनुशंसा प्राप्त होने के पश्चात ही संबंधित संगठन पर प्रतिबंध लगाया जाएगा । प्रतिबंधित संगठन के सदस्य रहनेवाले व्यक्तियों पर भी वैधानिक कार्रवार्ई की जाएगी ।

जन सुरक्षा अधिनियम की विशेषताएं –

१. कट्टर वामपंथी विचारधारा वाले संगठनों पर कार्रवार्ई : यदि कोई संगठन ‘सार्वजनिक व्यवस्था अथवा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए धोखा’ सिद्ध होता है, तो सरकार के अनुसार तत्काल कठोर कार्रवार्ई का प्रावधान ।
२. संपत्ति अधिग्रहण : प्रतिबंधित घोषित संगठनों के कार्यालय, परिसर एवं अन्य संपत्ति जब्त करने का अधिकार ।
३. बैंक खाते स्थगित करना : ऐसे संगठनों के बैंक खाते स्थगित किए जा सकेंगे ।
४. नवीन संगठनों पर भी प्रतिबंध : प्रतिबंधित संगठन के पदाधिकारी यदि नए नाम से संगठन स्थापित कर वही कार्य कर रहे हों, तो वह नई संस्था भी अवैध घोषित की जाएगी ।
५. प्रक्रियागत नियंत्रण : उप पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी) स्तर के अधिकारी की अनुमति के बिना कोई अपराध प्रविष्ट नहीं होगा । इससे कानून का दुरुपयोग टाला जा सकेगा ।

इस अधिनियम की आवश्यकता क्यों ?

१. केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को इस प्रकार का अधिनियम बनाने का सुझाव दिया है । तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, ओडिशा तथा झारखंड जैसे राज्यों ने पहले ही ऐसे कानून लागू किए हैं । सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार यदि सक्रिय आतंकवादी गतिविधियां न हों, तो ‘यूएपीए’ लागू नहीं होता। अतः ऐसे कानून की आवश्यकता है ।
२. इस कानून के माध्यम से माओवाद और नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण प्राप्त किया जा सकेगा ।