पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का बदलता हुआ तंत्र !

जम्मू-कश्मीर राज्य के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी आक्रमण से पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का परिवर्तित हो रहा तंत्र सामने आया है । विगत कुछ महिनों में ‘टारगेट किलिंग’ का (लक्ष्य कर हत्याओं का) प्रवाह कश्मीर में दिखाई दे ही रहा था; परंतु धर्म पूछकर हत्याएं करना आतंकियों द्वारा सर्वसामान्य लोगों के मन में भय उत्पन्न करना है । पाकसमर्थित आतंकी संगठन धार्मिक आधार पर दहशत उत्पन्न करने का प्रयास करते हैं । अमरनाथ यात्रा की पृष्ठभूमि पर किए गए वर्तमान आक्रमण में अन्य धर्मी लोग जम्मू-कश्मीर न आएं, यह चेतावनी आतंकियों को देनी है ।

 

१. आतंकियों द्वारा किए गए आक्रमणों में परिवर्तन

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हुआ आतंकी आक्रमण भीषण, नृशंस तथा उतना ही भेदक है । वर्ष २०१९ के पुलवामा आक्रमण के उपरांत यह सबसे बडा आतंकी आक्रमण है । पुलवामा का आक्रमण सैनिकों पर किया गया था; परंतु पहलगाम के आक्रमण में सर्वसामान्य नागरिकों को, विशेषकर पर्यटकों को लक्ष्य बनाया गया । यह परिवर्तन महत्त्वपूर्ण है तथा उसका सारगर्भ ध्यान में लेना आवश्यक है । पहलगाम में इससे पूर्व भी आतंकी आक्रमण हुए हैं । लगभग ढाई दशक पूर्व वर्ष २००० में अमरनाथ बेस कैंप पर हुए आक्रमण में ३० लोगों की मृत्यु हुई थी ।

वर्ष २००१ में शेषनागम में तीर्थयात्रा के लिए गए श्रद्धालुओं पर किए गए आतंकी आक्रमण में १३ लोग मारे गए थे । वर्ष २००२ में पहलगाम में हुए आक्रमण में ११ लोगों की मृत्यु हुई थी । वर्ष २०१७ में अमरनाथ यात्रा संपन्न कर घर लौट रहे श्रद्धालुओं में ८ लोगों की मृत्यु हुई थी, तथापि इस बार के आक्रमण में पर्यटकों को उनका नाम एवं धर्म पूछकर गोलियां मारी गईं । इसलिए इस आक्रमण का एक अलग पहलू है ।

२. पहलगाम के आक्रमण का प्रमुख तात्कालिक उद्देश्य

वास्तव में पहलगाम में उपयोग की गई पद्धति को देखा जाए, तो अल कायदा, इसिस जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन इस प्रकार की ‘मोडस ऑपरेंडी’ (कार्यप्रणाली) का उपयोग करते हुए दिखाई देते हैं । विगत कुछ वर्षाें से भारत विश्व समुदाय को एक बात निरंतर बताने का प्रयास कर रहा है, वह है पाकसमर्थित आतंकवाद के माध्यम से जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रविरोधी गतिविधियां चलानेवाले जैश-ए-मोहम्मद, लष्कर-ए-तोयबा जैसे संगठन पाक अधिकृत कश्मीर में सक्रिय हैं तथा वे वहां से भारत में आतंकी गतिविधियां फैलाने का काम कर रहे हैं । ये सभी संगठन धार्मिक आधार पर दहशत फैलाने का प्रयास करते हैं । इस माध्यम से उनका कहना है कि ‘अन्य धर्मी लोग जम्मू-कश्मीर न आएं ।’ वर्तमान में अमरनाथ यात्रा के उपलक्ष्य में इस क्षेत्र से बडी संख्या में श्रद्धालु जाएंगे । उनके मन में दहशत उत्पन्न करना पहलगाम के आक्रमण का एक प्रमुख तात्कालिक उद्देश्य है ।

डॉ. शैलेंद्र देवळाणकर

३. कश्मीर की समस्या का अंतरराष्ट्रीयीकरण करने हेतु आतंकी आक्रमण किए जाना

दूसरी बात यह कि इस आक्रमण से आतंकियों ने हाल ही के कुछ वर्षों मे आरंभ किए गए ‘टार्गेट किलिंग’ के नए प्रवाह को और एक भेदक मोड दे दिया है । धर्म पूछकर हत्या करने के माध्यम से आतंकियों को सर्वसामान्य लोगों के मन में भय उत्पन्न करना है । पूर्व में यूरोप में आतंकी संगठन ‘इसिस’ के द्वारा आक्रमण किए गए था । इन आक्रमणों में भी सर्वसामान्य लोगों को ही लक्ष्य बनाया गया था । ऐसा करने से पूरे देश से तीव्र प्रतिक्रियाएं व्यक्त होती हैं तथा माध्यमों से प्रसिद्धि मिलती है । पाकिस्तान का सदैव ही यह प्रयास रहा है कि जम्मू-कश्मीर में विशिष्ट समय साधकर आतंकी गतिविधियां चलाना ! इसके कारण कश्मीर के प्रश्न का अंतरराष्ट्रीयीकरण करने का उनका उद्देश्य सफल होता है । पिछले ३ दशकों का इतिहास देखा जाए, तो पाकिस्तान ने सदैव ही भारत की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण प्रसंगों के समय कश्मीर में आतंकी आक्रमण अथवा शस्त्रसंधि के उल्लंघन की घटनाएं की गई हैं ।

पिछले वर्ष प्रधानमंत्री के शपथग्रहण समारोह में पडोसी राष्ट्रों के प्रमुख भारत आए हुए थे, उस समय आतंकी आक्रमण हुआ था । उसके उपरांत जब देश का ध्यान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा की ओर लगा था, उसी समय कठुआ में आक्रमण किया गया । वर्ष २००० में जब बिल क्लिंटन भारत यात्रा पर आए थे तथा वे भारतीय संसद में भाषण दे रहे थे, उस समय भी कश्मीर में इसी प्रकार का आक्रमण किया गया था । इसके पीछे एक सुनियोजित रणनीति है, वह यह है कि पाकिस्तान को ऐसे आक्रमण कर कश्मीर समस्या का अंतरराष्ट्रीयीकरण करना है ।

पाकिस्तान को कैसे हानि पहुंचेगी ?

१. कृषि क्षेत्र पर होनेवाला परिणाम : पाकिस्तान की ७० प्रतिशत से अधिक खेती सिंधु नदी पर निर्भर है । इससे गेहूं, चावल, गन्ना जैसे महत्त्वपूर्ण फसलों पर इसका विपरीत परिणाम हो सकता है ।

२. पानी का अभाव/बिजली उत्पादन पर संकट : झेलम एवं सिंधु नदियों पर पाकिस्तान की ‘हाइड्रोपावर’ परियोजनाएं हैं; इसलिए यदि भारत ने पानी नहीं छोडा, तो उससे पानी के अभाव के कारण बिजली का उत्पादन ठप्प हो सकता है ।

३. बाढ एवं सूखा, दोनों से संकट : भारत ने यदि पानी संग्रहित कर एकदम से पानी छोडा, तो पाकिस्तान में अकस्मात बाढ आ सकती है अथवा पानी रोकने से सूखा पड सकता है ।

४. आंतरिक असंतोष एवं अस्थिरता : पानी, बिजली तथा अनाज के अभाव से पाकिस्तान के नागरिकों में क्षोभ उत्पन्न हो सकता है तथा उसका दंश पाकिस्तान को झेलना पड सकता है । अतः पाकिस्तान के सिंध, पंजाब, बलुचिस्तान जैसे क्षेत्रों में अशांति बढ सकती है ।

५. अर्थव्यवस्था पर बडा परिणाम : पाकिस्तान की आर्थिक नाकाबंदी करने की रणनीति । कृषि एवं बिजली पर अर्थव्यवस्था निर्भर है । उसके कारण देश का संपूर्ण उत्पादन घटकर बेरोजगारी एवं महंगाई बढने की संभावना है ।

– डॉ. शैलेंद्र देवळाणकर (२४.४.२०२५)

४. पहलगाम के आक्रमण में साधे गए समय का महत्त्व

अब भी पहलगाम आक्रमण का समय देखा जाए, तो यह स्पष्टता से ध्यान में आता है । अमेरिका के उपराष्ट्रपति भारत यात्रा पर आए हुए थे । ट्रम्प प्रशासन का कार्यकाल आरंभ होने के उपरांत पहली बार ही अमेरिका के उपराष्ट्रपति की विदेश यात्रा संपन्न हुई तथा इसके लिए उन्होंने भारत को चुना । उसके कारण उनकी यह यात्रा केवल भारत की दृष्टि से ही नहीं, अपितु विश्व की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण थी । तो दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सउदी अरब की यात्रा पर थे । उस यात्रा में भारत एवं सउदी में अत्यंत महत्त्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होनेवाले थे । ऐसे समय में इस्लामी जगत एवं पश्चिमी देशों के माध्यम भारतकेंद्रित बन गए थे । इस समय को लक्ष्य कर पहलगाम में आक्रमण किया गया, जिससे उसे पूरे विश्व में प्रसिद्धि मिल सके ।

५. भारत में अस्थिरता एवं अशांति फैलाने के पीछे पाकिस्तान का उद्देश्य

पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर के आक्रमणों को छोडकर शेष भारत में एक भी आतंकी आक्रमण नहीं हुआ है । सामाजिक वातावरण शांतिपूर्ण है । कोविड महामारी के उपरांत के काल में विश्व के पर्यटकों का भारत की ओर झुकाव बढता जा रहा है । ऐसे आक्रमणों के पीछे इन सभी सकारात्मक प्रवाहों को रोकने का उद्देश्य होता है । पाकिस्तान इस माध्यम से ऐसा दिखाने का प्रयास करता है कि ‘भारत में अस्थिरता एवं अशांति है ।’ विगत १० वर्षाें में भारत में विदेशी निवेश बडे स्तर पर बढ रहा है । विश्व के निवेशकों के लिए भारत प्रिय देश सिद्ध हो रहा है । इसका कारण यह है कि भारत विश्व का बडा लोकतांत्रिक देश है । ऐसी स्थिति में अशांति एवं अस्थिरता उत्पन्न कर यह निवेश अल्प कैसे किया जा सकेगा, यह पाकिस्तान का प्रयास होता है ।

– डॉ. शैलेंद्र देवळाणकर, विदेश नीति के विश्लेषक, पुणे. (२४.४.२०२५)