
नई देहली : जिस प्रेमसंबंध में सहमति से प्रेमसंबंध रखे गए हों, साथ ही शारीरिक संबंध स्थापित हुए हों तथा यह संबंध टूट गया; ऐसी स्थिति में पुरुष पर बलात्कार अथवा यौनशोषण का अपराध पंजीकृत नहीं किया जा सकता । ऐसे प्रकरणों को किसी भी प्रकार से अपराध का रूप नहीं दिया जा सकता, ऐसा निर्णय सर्वोच्च न्यायालय ने एक प्रकरण में दिया है ।
१. शिकायतकर्त्री महिला ने वर्ष २०१९ में यह आरोप लगाया था कि उसके प्रेमी ने उसे विवाह का वचन देकर उसके साथ बलात्कार किया, उसका यौन शोषण किया तथा बलपूर्वक शारीरिक संबंध रखे । उसने इस महिला को ‘तुमने यदि यौन संबंध नहीं रखे, तो मैं तुम्हारे परिवार को हानि पहुंचाऊंगा’, यह धमकी भी दी थी । उस स्त्री ने उसके विरुद्ध अपराध पंजीकृत किया था । उसके पश्चात आरोपी पुरुष ने यह आरोप रद्द करने के लिए आवेदन प्रविष्ट किया था । यह प्रकरण देहली उच्च न्यायालय में जाने पर न्यायालय ने यह मांग अस्वीकार की, तदुपरांत यह प्रकरण सर्वोच्च न्यायालय में पहुंचा ।
२. सर्वोच्च न्यायालय ने ‘महिला द्वारा लगाए गए आरोप आधारहीन हैं’, ऐसा बताते हुए उससे पूछा, ‘यदि वह पुरुष तुम्हारे साथ बलात्कार कर रहा था, तुम्हारा यौन शोषण कर रहा था, तो तुम उससे क्यों मिलती थीं ?’ दोनों ही सज्ञान होने से उनके मध्य सहमति से शारीरिक संबंध स्थापित हुए । यह सब विवाह का वचन देकर चल रहा था, इसका कोई संकेत नहीं मिलता । अतः इस प्रकरण में यौन शोषण अथवा बलात्कार का अपराध पंजीकृत नहीं किया जा सकता ।
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