
ढाका (बांग्लादेश) – चीन ने बांग्ला देश की सेना को निम्न गुणवत्ता के शस्त्र-अस्त्र बेचे, ऐसी बात सामने आई है। बांग्लादेश की सेना के कहनेनुसार चीन से खरीदे लडाकू विमान बम नहीं फेंक पाते हैं, रडार भी निरुपयोगी हैं। चीन से भेजे जाने वाले पुर्जे भी निम्न गुणवत्ता के हैं। इस बात को लेकर बांग्लादेश की सेना चिंतित है।
१. बांग्लादेश ने चीन से खरीदे युद्धपोतों को भी तांत्रिक समस्याओं का सामना करना पड रहा है। बांग्लादेश की वायु सेना भी चीन के ‘एफ्-७’ लडाकू विमानों से उब गई है। इन विमानों में अनेक अनेक तकनीकी दोष हैं।
२. वायु सेना के कहनेनुसार चीन मे निर्मित ‘के-८ डब्लू’ विमान में कुछ दिनों पश्चात समस्याएं आने लगी। चीन द्वारा प्राप्त एअर इंटरसेप्शन रडार भी ठीक से काम नहीं करता। बांग्लादेश के लडाकू विमानों में लगाए चिनी रडार भी अचूक मापदंडों की पूर्तता नहीं करते।
३. बांग्लादेश की सेना ने चीन के ‘नॉर्थ इंडस्ट्रिज कॉर्पोरेशन’ से ‘मेन बॅटल टँक’ मंगवाए थे। एक समाचार के अनुसार इन टैंकों के रखरखाव और देखभाल के लिए आवश्यक पुर्जों की आपूर्ति करने में भी चीन को अडचने आ रही हैं।
४. बांग्लादेशकी नौसेना को भी समस्याएं आ रही हैं। चीन में निर्मित २ युद्धपोतों में अनेक त्रुटियां पाई गई। इनकी देखभाल के लिए चिनी प्रतिष्ठानों ने अतिरिक्त पैसों की मांग की है।
५. एक दशक पहले चीन ने बांग्ला देश को नवीनीकृत पनडुब्बियां बेची थी। बांग्ला देश के ध्यान में आया की वे ठीक से काम ही नहीं कर सकती। पीछले वर्ष नौसेना ने परिवाद किया था कि, ‘बी.एन्.एस्. निर्मूल’ नामक युद्धपोत पर लगाया ‘सी ७०४’ उपकरण काम नहीं करता। तब चीन के प्रतिष्ठान ने इसे अद्यतन करने के लिए अतिरिक्त पैसों की मांग की थी।
म्यांमार की वायु सेना भी निम्न गुणवत्ता के चिनी शस्त्र-अस्त्रों के कारण त्रस्त !
चिनी वस्तुओं की निम्न गुणवत्ता के कारण केवल बांग्ला देश ही नहीं; किंतु म्यांमार की वायु सेना भी त्रस्त है। चिनी लडाकू विमानों में आ रही समस्याओं का उसे भी सामना करना पड रहा है। विशेषज्ञों के मतानुसार चीन के पास अभी भी उच्च गुणवत्ता के सैनिकी उपकरण बनाने की क्षमता नहीं है। चीन द्वारा बेचे जा रहे अधिकांश शस्त्र-अस्त्र निम्न श्रेणी के अथवा अप्रचलित प्रौद्योगिकी पर आधारित हैं। निर्धन देश चीन से शस्त्र-अस्त्र खरीदते हैं; क्योंकि वे सस्ते हैं।
संपादकीय भूमिकाचीन की वस्तुओं की गुणवत्ता अत्यंत निम्न स्तर की होती है, ऐसा अनुभव प्रत्येक देश तथा वहां की जनता को हो रहा है। यह देखते हुए आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि आगामी कुछ वर्षों में पूरा विश्व से चीन के साथ व्यापार करने का अघोषित बहिष्कार करेगा ! |
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