
मनोविकारों का मूल कारण है स्वेच्छा !
‘अपनी इच्छा के अनुसार न हो, तो मानसिक तनाव बढता है तथा आगे अनेक मनोविकार होते हैं । इसके लिए आजकल के मनोविकार विशेषज्ञ विविध उपाय सुझाते हैं; परंतु कोई भी यह नहीं सिखाता कि स्वेच्छा नहीं रखनी चाहिए । इस कारण पूरे विश्व में ऐसे रोगियों की संख्या बढती जा रही है । सर्वस्व का त्याग करनेवाले ऋषि-मुनियों और संतों को कभी भी मनोविकार नहीं हुआ । इसके विपरीत वे सदैव सच्चिदानंद अवस्था में रहते थे ।’
हिन्दुओ, हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हेतु कठोर प्रयास करो !
‘हिन्दुओ, ब्रिटिशों की गुलामी से मुक्त होने के उपरांत हिन्दुस्तान में राममंदिर की स्थापना होने में ७७ वर्ष लग गए । भारत में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना होने पर तो सर्वत्र मंदिर बनेंगे ही; परंतु ‘हिन्दू राष्ट्र’ की स्थापना होने हेतु और कब तक प्रतीक्षा करोगे । इसे शीघ्र स्थापित करने हेतु अभी से सभी स्तरों पर कठोर प्रयास करो !’
ईश्वरीय राज्य में शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य !
‘संसार के किसी भी देश के शासनकर्ता ‘जनता सात्त्विक बने’, इस उद्देश्य से उसे साधना नहीं सिखाते । ईश्वरीय राज्य में शिक्षा का यही प्रमुख उद्देश्य होगा ।’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?