
अपराध रोकने के लिए साधना अपरिहार्य है !
‘भारत में पुलिस के साथ ही सभी क्षेत्रों में अपराधी हैं, यह स्वतंत्रता से लेकर अभी तक के सभी शासनकर्ताओं के लिए लज्जाजनक है । बच्चों को पाठशाला में साधना सिखाते, तो बडे होकर वे अपराधी न बनते ।’
इसीलिए मंदिरों का सरकारीकरण नहीं होना चाहिए !
‘मंदिर भक्तों के पास ही रहने चाहिए, तभी भगवान की सेवा भावपूर्ण होगी । सरकारीकरण के कारण मंदिर में भगवान की सेवा भावपूर्ण नहीं होती तथा जैसा सरकार में किया जाता है, वैसा ही भ्रष्टाचार मंदिर में भी किया जाता है । इससे भगवान मंदिर से चले जाएंगे और भक्तों को मंदिर में जाने का लाभ नहीं मिलेगा ।’
हिन्दू धर्म की अद्वितीयता !
‘कुछ अन्य पंथों के समान हिन्दू धर्म में धर्मप्रसार कर केवल अपने धर्म के लोगों की अथवा अपने अनुयायियों की संख्या बढाना महत्वपूर्ण नहीं है । इसके विपरीत हिन्दू धर्म में धर्म की गहनता में, सूक्ष्मता में जाना महत्वपूर्ण है । इसका अर्थ है, ‘हिन्दू धर्म में हिन्दू धर्म के शाश्वत मूल्य तथा सिद्धांत समझकर, उसके अनुसार आचरण कर, धर्म की अनुभूति लेना अर्थात साक्षात ईश्वर की अनुभूति लेना महत्वपूर्ण है ।’ हिन्दुओं का धर्मप्रसार इसी सिद्धांत पर आधारित है । इसी कारण हिन्दू धर्म से अनभिज्ञ सहस्रों अन्य पंथ के विदेशी लोग आज भी हिन्दू धर्म की ओर आकर्षित होकर, हिन्दू धर्म के अनुसार आचरण कर रहे हैं ।’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
सात्त्विकता एवं संगठन ही राष्ट्र के उत्कर्ष की चाबी – जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
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छोटे बच्चों को गोमांस देने का परामर्श का प्रकरण !
संपादकीय : नागरिक शास्त्र केवल पुस्तक में ?
केरल में दीपप्रज्वलन का विवाद : राष्ट्रीय व्यक्तित्व की आत्मा संस्कृति है या धर्म ?