
अभी अनेक साधकों को अनिष्ट शक्तियों का कष्ट हो रहा है । पितृपक्ष में ( १० सितंबर से २५ सितंबर २०२२ तक ) यह कष्ट बढता है, इसलिए इस कालावधि में प्रतिदिन सुधारित नामजप ‘ॐ ॐ श्री गुरुदेव दत्त ॐ ।’ करना है । इसके पूर्व प्रसिद्ध किए नामजप के अनुसार पीछे २ बार ‘ॐ’ न बोलते हुए एक बार ही ‘ॐ’ बोलना है । यह सुधारित नामजप sanatan.org इस संकेतस्थल पर उपलब्ध है ।
सुधारित नामजप के लिए लिंक –
https://www.sanatan.org/hindi/a/149.html
यह नामजप न्यूनतम १ घंटा करें । जो साधक स्वयं को होनेवाले अनिष्ट शक्ति का कष्ट दूर करने के लिए आध्यात्मिक उपाय करते हैं, वह उनके उपायों के नामजप के अतिरिक्त दत्त का नामजप न्यूनतम १ घंटा करें । दत्त का नामजप करते हुए हाथ की पांचों उंगलियों के सिरे जोड़कर अनाहत चक्र और मणिपुर चक्र पर न्यास करें ।
जो साधक आध्यात्मिक उपाय नहीं करते हैं, वह व्यक्तिगत कार्य, स्नान, स्वच्छता-सेवा आदि करते समय दत्त का नामजप न्यूनतम १ घंटा करें; जिन्हें पूर्वजों का कष्ट है वह ही बैठकर और मुद्रा कर दत्त का नामजप करें ।
– (सद्गुरु) डॉ. मुकुल गाडगीळ, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (१४.९.२०२२)
साधको, शब्दशक्ति के माध्यम से संदेह फैलाने हेतु सक्रिय सातवें पाताल की बडी अनिष्ट शक्तियों की चाल पहचानकर साधना बढाओ !
साधको, जिज्ञासुओं के ‘हमारे’ बन जाने पर नहीं, अपितु वे ‘हमारे’ बनें; इसके लिए तत्परता से उन्हें पाठक बनाएं !
अक्षय तृतीया के उपलक्ष्य में सर्राफा दुकानदारों को उनके ग्राहकों को उपहार के रूप में सनातन के ग्रंथ एवं लघुग्रंथ देने के लिए प्रेरित करें !
अक्षय तृतीया के पर्व पर ‘सत्पात्र को दान’ देकर ‘अक्षय दान’ का फल पाएं !
अध्यात्म के संदर्भ में लेखन अथवा लेख से संबंधित नियतकालिक / ग्रंथ हों, तो कृपया सनातन को भेजें !