परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के ओजस्वी विचार

‘हिन्दू राष्ट्र की पाठशाला में भूगोल, गणित, रसायन शास्त्र जैसे जीवन में जिनका कोई उपयोग नहीं, ऐसे विषयों की अपेक्षा, ‘बच्चे सात्त्विक कैसे हों ?’, इसका अर्थ ‘साधना कैसे करें ?’ इसकी शिक्षा दी जाएगी । इस कारण जिस प्रकार रामराज्य में नहीं थे, उसी प्रकार भ्रष्टाचार, बलात्कार, गुंडागिरी, हत्या इत्यादि भी हिन्दू राष्ट्र में नहीं होगी !’
– (परात्पर गुरु) डॉ. आठवले
‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का वाक्य ब्रह्मवाक्य होता है’, इसकी १८ वर्ष उपरांत हुई प्रतीति !
सात्त्विकता एवं संगठन ही राष्ट्र के उत्कर्ष की चाबी – जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी
परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा साधकों को किया गया अनमोल मार्गदर्शन !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की विभिन्न कृतियों से प्रक्षेपित स्पंदनों का अध्ययन
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के माथे पर अंकित कमल सुस्पष्टता से दिखाई देने का कारण !