
‘शाकाहार से मनुष्य सत्त्वगुणी बनता है । सत्त्वगुण के संवर्धन से उसकी आध्यात्मिक उन्नति होती है, अर्थात नरजन्म का सार्थक करनेवाले सत्त्वगुणी आहार का सेवन करना धर्मपालन है । धर्मपालन का अर्थ है योग्य आचारसंहिता को स्वीकार कर, उस अनुसार आचरण कर धर्म को, परिणामस्वरूप ईश्वर को अच्छा लगना !
शाकाहार से देह के तमोगुण का लय होता है और मनुष्य देवसंस्कृति की ओर यात्रा करने लगता है । शाकाहार, नर से नारायण बनाने का कार्य करता है । इसलिए शाकाहार करना, धर्मपालन करने समान ही है ।’
– एक विद्वान (श्रीचित्शक्ति [श्रीमती] अंजली गाडगीळजी ‘एक विद्वान’ इस नाम से यह भाष्य करती हैं । ४.३.२००८)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?