विश्व में भारत को बेइज्जत करने वाली स्वास्थ्य व्यवस्था ! ऐसी व्यवस्था से हमारे प्राणों की रक्षा होगी, ऐसी अपेक्षा करने की बजाय भारतीयों को अब भगवान को पुकारना चाहिए, यह सबसे उचित होगा ! गुजरात उच्च न्यायालय ने ऐसी स्थिति देखकर ‘भगवान भरोसे’ रहने की सलाह दी है !

पाटलीपुत्र (बिहार) – शहर का दूसरा बडा अस्पताल एन.एम.सी.एच. में अनेक कोरोना मरीजों की मृत्यु हो रही है । अस्पताल के बाहर एम्बुलेंस की कतार लगी है । समय पर उपचार न मिलने से अनेक मरीज एम्बुलेंस मे ही प्राण त्याग रहे हैं । इस कारण रिश्तेदार गुस्से में हैं । अस्पताल की परिस्थिति भी विदारक है । आक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता न होने से मरीजों के शरीर में बिसलेरी का पानी चढाया जा रहा है । डॉक्टर मरीजों को देखने भी नहीं आते हैं । अस्पताल में पलंग न मिलने से बाहर प्रतीक्षा में बैठे मरीजों की संख्या अधिक है । मरीजों के रिश्तेदार कितने घंटों तक परेशानी में खडे हैं । अस्पताल प्रशासन द्वारा प्रतिसाद न मिलने के कारण अनेक लोग मरीजों को घर लेकर जा रहे हैं, ऐसी स्थिति है ।
१३ अप्रैल को इस अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री ने दौरा कर परिस्थिति का ब्योरा लिया था । उसी समय एम्बुलेंस से आए मरीज को भरती न करने से उसकी अस्पताल के बाहर ही मृत्यु हो गई थी ।
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(और इनकी सुनिए…) ‘ वर्तमान काल में वैकुंठगमन इत्यादि कहना मुझे स्वीकार्य नहीं है, यह विशिष्ट वर्ग द्वारा थोपी गई बातें हैं । ’- Sharad Pawar
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