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गोवा में राज्य निर्वाचन आयुक्त के पद का अतिरिक्त प्रभार एक सरकारी अधिकारी को सौंपने का प्रकरण !
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जिन राज्यों में चुनाव आयुक्तों के पास अतिरिक्त कार्यभार हैं, उन्हें तत्काल त्यागपत्र देने का आदेश !

नई दिल्ली : राज्य निर्वाचन आयुक्त का पदभार किसी सरकारी अधिकारी को सौंपना लोकतंत्र का उपहास है, ऐसा कहते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि, एक स्वतंत्र व्यक्ति को चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त किया जाए । गोवा सरकार ने राज्य चुनाव आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार राज्य के कानून सचिव को सौंप दिया था । इस पृष्ठभूमि में सर्वोच्च न्यायालय ने यह आदेश पारित किया । सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि जिन राज्यों में चुनाव आयुक्तों के पास अतिरिक्त कार्यभार हैं, वे तत्काल त्यागपत्र दें । सर्वोच्च न्यायालय ने यह आदेश दिया कि, ‘न तो कोई सरकारी कर्मचारी और न ही नौकरशाह चुनाव आयुक्त का पद आभूषित कर सकता है ।’
१. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रोहिंग्टन फली नरीमन, न्यायमूर्ति बी.आर.गवई तथा न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय के न्यायपीठ के समक्ष इस प्रकरण की सुनवाई की गई ।
२. उच्च न्यायालय के गोवा न्यायपीठ ने, गोवा में नगरपालिका प्रभारों के आरक्षण तथा पुनर्गठन की अधिसूचना को स्थगिती दी थी । गोवा सरकार ने गोवा न्यायपीठ के इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में आह्वान दिया था । इस न्यायपीठ के समक्ष प्रकरण की सुनवाई की जा रही थी ।
३. अपने निर्णय में, सर्वोच्च न्यायालय ने नगरपालिका आरक्षण के संबंध में मुंबई उच्च न्यायालय के गोवा न्यायपीठ का आदेश कायम किया तथा राज्य सरकार को निर्देश दिया कि, वह अगले १० दिनों में मूरगाव, म्हापसा, मडगाव, केपे एवं सांगे नगरपालिकाओं के आरक्षण को अधिसूचित करें । उसी प्रकार उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग को ३० अप्रैल तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है ।
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