
नई दिल्ली – चीन की ओर से चालू कुप्रचार निष्फल करने के लिए भारतीय सेना ने तिब्बत का इतिहास, वहां की संस्कृति और भाषा जान कर लेने की रणनीति बनाई है । प्रत्यक्ष सीमा रेखा के दोनो ओर बसे तिब्बत का गहराई से अध्ययन करने के लिए सैन्य अधिकारियों को सूचना दी जाने वाली है । आर्मी ट्रेनिंग कमांड (ए.आर.टी.आर.ए.सी.) इस संदर्भ में प्रस्ताव का विश्लेषण पर काम कर रही है । ए.आर.टी.आर.ए.सी. ने तिबेटोलाजी में स्नातकोत्तर शिक्षा देने वाली ७ संस्थाओं की जानकारी प्राप्त की है । इन स्थानों पर सेना के अधिकारियों को शिक्षा लेने के लिए भेजा जा सकता है ।
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(और इनकी सुनिए…) ‘ वर्तमान काल में वैकुंठगमन इत्यादि कहना मुझे स्वीकार्य नहीं है, यह विशिष्ट वर्ग द्वारा थोपी गई बातें हैं । ’- Sharad Pawar
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