जो देश अपने मित्रराष्ट्रों के साथ धोखाधडी कर सकता है, वह भारत जैसे उसके शत्रुराष्ट्र के साथ कितनी धोखाधडी करता होगा, यह बात ध्यान देनेयोग्य है ! वर्ष १९६२ में भारत पर किया गया आक्रमण भी भारत के साथ बडी धोखाधडी ही थी ! अब पूरे विश्व को संगठित होकर चीन को स्थाईरूप से पाठ पढाना चाहिए !

नई देहली – चीन विश्व में ५वें क्रम के शस्त्रास्त्रों का निर्यात करनेवाला देश है । चीन ने अपने मित्रराष्ट्रों को शस्त्रास्त्रों की बिक्री करते समय घटिया गुणवत्तावाले शस्त्र बेचकर उनके साथ धोखाधडी की, यह जानकारी अब सामने आ रही है । इससे पूर्व चीन ने नेपाल को घटिया गुणवत्तावाला यात्री विमान बेचकर उसके साथ धोखाधडी करने की बात उजागर हुई थी । साथ ही चीन ने कोरोना काल में अनेक देशों को घटिया गुणवत्तावाले पीपीई किट्स और मास्क भेजे थे ।
१. चीन ने वर्ष २०१७ में बांग्ला देश को वर्ष १९७० की बनावटवाली ‘मिंग’ श्रेणी की ‘०३५ जी’ पनडुब्बियां बेची थीं, जिनका मूल्य १०० मिलियन डॉलर था । इन पनडुब्बियों का उपयोग केवल लडाकू प्रशिक्षण के लिए करने पर भी वे पूरी क्षमता के साथ कार्य करने में सक्षम नहीं थीं ।
२. बांग्ला देश द्वारा वर्ष २००३ में चीन से खरीदी गई ‘मिंग’ श्रेणी की पनडुब्बी दुर्घटनाग्रस्त हो गई, साथ ही चीन से खरीदी गई ‘ओमर फारूख’ और ‘अबू उबैदा’ दोनों युद्धनौकाओं के नेविगेशन रडार और तोप के तंत्र में दोष पाया गया था ।
३. बांगला देश द्वारा अस्वीकृत चीन के (वाई १२ इ और एमए ६०) ६ विमान नेपाल ने अपने राष्ट्रीय प्रतिष्ठान के लिए खरीदे; परंतु ये सभी विमान नेपाल पहुंचते ही निरुपयोगी हो गए ।
४. चीन ने पाकिस्तान के साथ मित्रता के नाम पर घटिया गुणवत्तावाले शस्त्र बेचे । चीन ने पाकिस्तान को ‘एफ २२ पी’ युद्धनौका बेची थी; किंतु कुछ समय पश्चात उसमें उत्पन्न कई तांत्रिक समस्याओं के कारण वह खराब हो गई।
५. केनिया को युद्धवाहनों की आवश्यकता थी, तब उसने चीन से उनकी खरीदारी की; परंतु इन वाहनों में आईं तांत्रिक समस्याओं के कारण केनिया के अनेक सैनिकों को अपने प्राण गंवाने पडे ।
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