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नेपाल सरकार द्वारा अपने कानून में भारत द्वेषी सुधार करने का निर्णय
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नेपाल में विवाहित भारतीय महिलाएं नेपाल के राजनीतिक अधिकारों से वंचित रहेंगी
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नेपाल एवं भारत के मध्य पारिवारिक संबंधों को समाप्त करने हेतु नेपाल सरकार का कदम
चीन के बलपर नेपाल भारत के विरुद्ध जो कुछ भी कर रहा है, वह उसे विनाश की ओर ले जा रहा है, यह जब उसके ध्यान में आएगा, वह दिन उसके लिए शुभदिन सिद्ध होगा !

काठमांडू (नेपाल) – नेपाली पुरुषों के साथ विवाह कर नेपाल गईं भारतीय महिलाओं को अब नेपाल की नागरिकता मिलने हेतु ७ वर्ष तक प्रतीक्षा करनी होगी । ऐसी स्थिति में नेपाल में विवाहित भारतीय महिलाओं को सभी प्रकार के राजनीतिक अधिकारों से वंचित रहना पडेगा । २० जून को नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के निवासपर संपन्न नेपाल कम्युनिस्ट दल की बैठक में नागरिकता विषय से संबंधित कानून में संशोधन को संसद में पारित करने का निर्णय लिया गया । इस कानून को बनाने के पीछे नेपाल एवं भारत के मध्य पारिवारिक संबंधों को समाप्त करना ही मुख्य उद्देश्य है ।

१. नेपाल में कम्युनिस्ट दल और उनकी सरकार की ओर से जानबूझकर यह झूठ फैलाया गया है कि भारत में विदेशी महिलाओं को भारतीय पुरुष के साथ विवाह करने के ७ वर्ष पश्चात भारत की नागरिकता दी जाती है । वास्तव में यह नियम नेपाली महिलाओं के लिए लागू नहीं है । अतः इस प्रकार से भारत के विरुद्ध दुष्प्रचार किया जा रहा है ।
२. नेपाल एवं भारत के मध्य वर्ष १९५० की मित्रता के अनुबंध के प्ररिप्रेक्ष्य में दोनों देश एक-दूसरे के नागरिकों को अपने ही देश के नागरिक मानकर उनके साथ समानता से व्यवहार करेंगे और उन्हें अधिकार भी देंगे, इसका प्रावधान है; किंतु अब नेपाल सरकार उसके विपरीत यह नया कानून बना रही है ।
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