Illegal Infiltration Committee : घुसपैठ जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा समिति की स्थापना l

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

नई दिल्ली – केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने देश में जनसंख्या का संतुलन बिगडने तथा अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय परिवर्तनों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित किए जाने की सूचना दी । यह समिति धार्मिक तथा सामाजिक स्तर पर असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों का विश्लेषण कर समयबद्ध उपायों का सुझाव देगी । संपूर्ण देश के आंकडों की जांच कर घुसपैठियों के कारण कहां जनसंख्या में आकस्मिक वृद्धि हुई है, इसका शोध करेगी । सरकार का कथन है कि घुसपैठ के कारण देश के अनेक भागों में जनसंख्या की संरचना परिवर्तित हो रही है तथा यह सुरक्षा के लिए एक बडी चुनौती है ।

आकस्मिक जनसंख्या वृद्धिवाले क्षेत्रों में भूमि, जल, रोजगार एवं राशन जैसे सीमित संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव को न्यून करने के लिए इस समिति के विवरण के आधार पर नीतियां बनाई जाएंगी । समिति के प्रतिवेदन पर भविष्य में सीमा सुरक्षा को सुदृढ करने, साथ ही नागरिकता नियमों को कठोर करने एवं राष्ट्रीय सुरक्षा को बल देने के लिए नए विधान लागू किए जा सकते हैं ।

६५ वर्षों में हिन्दू ७.८ प्रतिशत घटे, जबकि मुसलमान ४.२५ प्रतिशत बढे

सरकारी आंकडों के अनुसार वर्ष १९५० से २०१५, इन ६५ वर्षों में कुल जनसंख्या में हिन्दू जनसंख्या ७.८२ प्रतिशत न्यून हुई । इसी अवधि में मुसलमानों की जनसंख्या ९.८४ प्रतिशत से बढकर १४.०९ प्रतिशत हो गई । ईसाई ०.१२ प्रतिशत तथा सिख ०.६१ प्रतिशत से बढे ।

बंगाल में मुसलमानों की असामान्य वृद्धि

वर्ष १९५१ में बंगाल में मुसलमानों की जनसंख्या १९.५ प्रतिशत थी, जो वर्ष २०११ में २७ प्रतिशत हो गई । अब इसमें, अर्थात विगत १५ वर्षों में और अधिक वृद्धि होने की बात कही जा रही है ।

सर्वोच्च न्यायालय ने घुसपैठ को अघोषित बाह्य आक्रमण माना !

सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष २००५ में ‘सर्वानंद सोनोवाल बनाम भारतीय संघ’ वाद में असम में अवैध प्रवासियों की पहचान से संबंधित एक प्राचीन विधान को निरस्त करते हुए अत्यंत कठोर टिप्पणी की थी । न्यायालय ने कहा था कि बांग्लादेश से असम में होनेवाली घुसपैठ ने राज्य के नागरिकों के जीवन को प्रभावित किया है । यह एक ‘अघोषित बाह्य आक्रमण’ के सदृश है ।