सार्वजनिक भूमि पर नमाज पढने का अधिकार नहीं ! – Allahabad High Court

इलाहाबाद उच्च न्यायालय का महत्त्वपूर्ण निर्णय ।

प्रयागराज (उत्तरप्रदेश) – सार्वजनिक भूमि का उपयोग किसी भी एक धर्म द्वारा धार्मिक कृत्यों के लिए नहीं किया जा सकता, ऐसा कहते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक भूमि पर नमाज पढने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है ।

उत्तरप्रदेश के संभल जिले के इकौना निवासी असीन की याचिका को अस्वीकार करते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि :

१. सार्वजनिक भूमि पर सभी का समान अधिकार होता है । इसका एकपक्षीय उपयोग विधि सम्मत नहीं है ।

२. पूर्व के ‘मुनाजिर खान विरुद्ध उत्तरप्रदेश राज्य एवं अन्य’ प्रकरण में उच्च न्यायालय ने निजी परिसर के भीतर सद्भावनापूर्ण प्रार्थना का संरक्षण करते हुए यह माना था कि व्यक्तिगत धार्मिक प्रथा में मनमाने ढंग से हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता; परंतु इस निर्णय को ऐसा मानकर नहीं पढा जा सकता कि निजी परिसर में संगठित अथवा नियमित सामूहिक कृत्यों को पूर्ण छूट प्राप्त है ।

३. धर्म के पालन का अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था के अधीन है तथा उसका उपयोग इस प्रकार नहीं किया जा सकता, जिससे दूसरों के अधिकारों में हस्तक्षेप हो ।

४. यदि भूमि निजी भी मान ली जाए, तब भी याचिकाकर्ता वांछित छूट के लिए पात्र नहीं है । अभिलेखों से यह सिद्ध होता है कि वह किसी वर्तमान प्रथा का संरक्षण नहीं कर रहा है, अपितु ग्राम के एवं बाहरी व्यक्तियों को सम्मिलित कर नियमित सामूहिक सभा आरंभ करने की मांग कर रहा है ।

५. यदि सार्वजनिक भूमि का अनुचित रूप से हस्तांतरण कर भीड एकत्र करके नमाज पढने की मांग की जा रही है, तो ऐसा हस्तांतरण अवैध माना जाएगा ।