Saida Begum arrested : भाग्यनगर (तेलंगाना) से बंदी बनाई गई सईदा बेगम इस्लामिक स्टेट की ‘खवातीन’ (महिला) संगठन की प्रमुख !

‘इन्फ्लुएंसर’ के नाम पर कर रही थी जिहादी आतंकवादी गतिविधियां !

(‘इन्फ्लुएंसर’ का अर्थ है प्रभाव डालनेवाला)

इंस्टाग्राम ‘इन्फ्लुएंसर’ सईदा बेगम

विजयवाडा (अमरावती) – पिछले महीने आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा बंदी बनाई गई भाग्यनगर की ३८ वर्षीय इंस्टाग्राम ‘इन्फ्लुएंसर’ सईदा बेगम से पूछताछ में गंभीर जानकारी सामने आई है । सईदा पर अंतरराज्यीय आतंकवादी ‘मॉड्यूल’ (आतंकवादी गतिविधियों की योजना तथा उनके क्रियान्वयन के लिए बनाई गई इकाई) से जुडे होने तथा ‘खवातीन’ (महिला) नाम की एक अलग महिला आतंकवादी शाखा स्थापित करने की तैयारी करने का आरोप है । यह कार्रवाई विजयवाडा में पकडे गए एक बडे ‘मॉड्यूल’ के अंतर्गत की गई है एवं इसकी जांच अभी जारी है । इस अभियान में अब तक ६ राज्यों से १२ संदिग्धों को बंदी बना लिया गया है ।

ऑनलाइन कट्टरपंथ तथा ४२ महिलाओं की भर्ती का आरोप !

सईदा बेगम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कट्टरपंथी गतिविधियों में सम्मिलित थी । उसने इस्लामिक स्टेट एवं अल-कायदा से जुडे ऑनलाइन समूहों के माध्यम से ४२ महिलाओं को इस नेटवर्क से जोडा था । इन समूहों में अल-कायदा के आतंकवादी ओसामा बिन लादेन के वीडियो एवं जाकिर नाइक तथा इसरार अहमद जैसे कट्टरपंथी प्रचारकों के भडकाऊ भाषण प्रसारित किए जाते थे । जांच एजेंसियों के अनुसार, सईदा इन समूहों में जिहादी सामग्री फैलाने के लिए लोगों को प्रेरित करती थी तथा युवाओं को प्रभावित करने का प्रयास करती थी ।

‘खवातीन’ शाखा एवं आक्रमणों का षड्‌यंत्र !

पुलिस के अनुसार, सईदा को ‘खवातीन’ नामक महिला आतंकवादी शाखा का नेतृत्व करने के लिए तैयार किया जा रहा था । इस शाखा के अंतर्गत महिलाओं को हथियार चलाना, ‘स्नाइपर राइफल्स’ और विस्फोटकों का उपयोग सिखाने की योजना थी, ताकि देशभर में आतंकवादी आक्रमण किए जा सकें । इस ‘मॉड्यूल’ के तार पाकिस्तान स्थित ‘हैंडलर्स’ (आतंकवादियों को संचालित करनेवाले) से जुडे हैं । सईदा इस नेटवर्क के मुख्य आरोपी रहमतुल्लाह शरीफ के साथ काम कर रही थी, जिसे २४ मार्च २०२६ को विजयवाडा से बंदी बना लिया गया था ।

सामान्य महिला से आतंकवादी तक का सफर !

सईदा बेगम चंचलगुडा क्षेत्र में अपने माता-पिता तथा ६ वर्षीय बेटे के साथ एक छोटे किराए के घर में रहती थी । पति से अलग होने के उपरांत वह घरों में काम करके परिवार का पालन-पोषण करती थी । उसने घर में खाना बनाते हुए अपने रील्स बनाना आरंभ किया, पश्चात स्थानीय दर्जियों एवं छोटे व्यवसायों के विज्ञापनवाले वीडियो बनाकर वह ५०० से १००० रुपये तक कमाने लगी ।

संपादकीय भूमिका 

ऐसे लोगों को जेल में रखकर पालने की अपेक्षा, उन पर फास्ट-ट्रैक कोर्ट में अभियोग चलाकर उन्हें फांसी का दंड दिलाने के लिए सरकार को प्रयास करने चाहिए !