Agricultural Exports : महाराष्ट्र के अंगूर, प्याज, चावल तथा केले के निर्यात पर गंभीर प्रभाव !

  • मध्यपूर्व में सक्रिय युद्ध के परिणाम

  • अनेक उत्पादों के ‘कंटेनर’ अवरुद्ध

मुंबई – अमेरिका, इजरायल तथा ईरान के मध्य व्याप्त युद्ध के परिणाम महाराष्ट्र में भी दिख रहे हैं । जे. एन. पी. टी. पत्तन (JNPT Port) पर अंगूर के कंटेनर (विशाल लौह पेटिका) रुक गए हैं । पत्तन पर प्याज, चावल, केले एवं अन्य कृषि उत्पादों के कंटेनरों की भी अत्यधिक संख्या हो गई है । इस कारण कुछ सीमा तक बाधाएं उत्पन्न हुई थीं; किन्तु अब स्थिति सामान्य हो रही है, ऐसी सूचना महाराष्ट्र राज्य अंगूर उत्पादक संघ एवं अंगूर निर्यातक संघ के अध्यक्ष कैलासराव भोसले ने दी है ।

१. ३५० कंटेनर अंगूर वर्तमान में सांगली के ‘शीतगृह’ (कोल्ड स्टोरेज) में हैं, जबकि ७०० से अधिक कंटेनर की मात्रा में जितने अंगूर अभी उद्यानों में ही है । मुंबई के पत्तन पर अंगूर के ३०० कंटेनर रुके हुए हैं । इस कारण लगभग १५ सहस्र टन अंगूर खाडी देशों में जाने से रुक गई है । सभी स्थानों पर अंगूर का निर्यात किस प्रकार किया जाए, यह प्रश्न किसानों को चिंतित कर रहा है ।

२. लातूर से निर्यात किया गया सैकड़ों टन माल ईरान के पत्तन पर पडा हुआ है । इसके कारण लातूर के व्यापारियों की आर्थिक स्थिति संकटपूर्ण हो गई है ।

३. जलगांव जनपद के १०० से अधिक केले (कदली) के कंटेनर जे. एन. पी. टी. पत्तन पर रुके हैं । रमजान मास के कारण केलों (कदली) का मूल्य २ सहस्त्र ५०० रुपये तक प्राप्त हो रहा था; परंतु युद्ध के कारण अब केवल १ सहस्त्र से १ सहस्त्र ५०० रुपये तक ही मूल्य प्राप्त हो रहा है ।