भगवान विष्णु के लिए खजुराहो में उपवास करेंगे ! – अधिवक्ता डॉ. राकेश किशोर

सरन्यायाधीश भूषण गवई पर जूता फेंकने का प्रयास करने वाले अधिवक्ता डॉ. राकेश किशोर की घोषणा

नई दिल्ली – मैं स्वयं को अत्यंत भाग्यवान मानता हूं कि भगवान विष्णु ने यह कार्य करने के लिए १०० करोड हिन्दुओं में से मुझे चुना है । मैं न झुकूँगा, न भयभीत होऊँगा । भगवान विष्णु के लिए खजुराहो में उपवास करुंगा । उसकी संपूर्ण तैयारी हो चुकी है एवं मुझे उसके लिए भगवान का आदेश प्राप्त हुआ है, ऐसा वक्तव्य सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के समय सरन्यायाधीश भूषण गवई पर जूता फेंकने का प्रयास करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ॰ राकेश किशोर ने किया । वे यहां पत्रकारों से बोल रहे थे ।

मुझ पर आक्रमण हो सकता है !

मेरे जीवन को संकट है । कुछ लोग सदा ही ‘सर तन से जुदा’ अर्थात् शिरच्छेद करने को उत्सुक रहते हैं । मुझ पर आक्रमण हो सकता है । मुझे निरंतर धमकियां मिल रही हैं । भयवश मैंने घर से बाहर जाना तथा भ्रमण करना भी बंद कर दिया है ; किन्तु मुझे भगवान विष्णु पर पूर्ण विश्वास है । भगवन् के आदेशानुसार मैं खजुराहो उपवास हेतु जा रहा हूं । भगवान विष्णु की मूर्ति पुनः स्थापित करने के लिए मैं प्राण देने को भी तत्पर हूं । यदि यह कार्य इस जन्म में न हो सका, तो अगले जन्म में अवश्य पूर्ण करुंगा ।

न्यायालय की टिप्पणी से नूपुर शर्मा का जीवन नष्ट हुआ !

सर्वोच्च न्यायालय के वचन एवं कर्म में अंतर आ गया है । नूपुर शर्मा का जीवन नष्ट हो गया । वे भूमिगत हैं । वह एवं उनका परिवार कहां हैं, किसी को ज्ञात नहीं । ऐसी जीवनशैली कौन जी सकेगा ? यह सब एक न्यायालयीन टिप्पणी के कारण घटित हुआ । न्यायालय ने नूपुर शर्मा को फटकार लगाई ; परंतु ‘सर तन से जुदा’ कहने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की । नूपुर शर्मा जैसी नारी आज जीवित होकर भी प्रतिदिन मर रही है । कन्हैयालाल की निर्दयतापूर्वक हत्या की गई, उसका चित्रण भी किया गया ; परंतु हत्यारे आज भी मुक्त घूम रहे हैं ।

‘सर तन से जुदा’ कहने वालों पर न्यायाधीश मौन रहते हैं !

‘सनातन’ विषय के संदर्भ में जब कुछ आता है, तब न्यायाधीश टिप्पणी करते हैं ; परंतु ‘सर तन से जुदा’ कहने वालों के विषय में मौन रहते हैं । यदि साहस है, तो उन पर भी टिप्पणी करें । अब यह चलने वाला नहीं । आज सनातन धर्म की जो अवस्था है, वह हमारे मौन के कारण है । हमने अपमान सहा, किन्तु कभी कार्य नहीं किया । केवल लेख लिखकर रुक गए ।

‘गजवा-ए-हिन्द’ की तैयारी चल रही है !

वे (धर्मान्ध मुसलमान) ‘गजवा-ए-हिन्द’ अर्थात् भारत के इस्लामीकरण के लिए युद्ध की तैयारी कर रहे हैं । भारत को ईरान समान बनाना उनका उद्देश्य है । मैंने स्वयं पश्चिम उत्तरप्रदेश एवं झारखण्ड में इसकी झलक देखी है । वर्ष १९४७ में इस्लामी देशों की संख्या १० से १२ थी, अब वह ५७ हो गई है । देश के युवकों को विचार करना चाहिए कि यदि कल परिस्थिति बिगड़ी, तो वे कहां जाएंगे ?

मुझे क्षमा किया गया, फिर भी सरन्यायाधीश को धन्यवाद नहीं करूंगा !

जूता फेंकने के प्रकरण में सरन्यायाधीश भूषण गवई ने मुझे क्षमा किया, इस विषय में राकेश किशोर ने कहा – मैं उनका धन्यवाद नहीं दूँगा । उन्होंने मुझे क्षमा किया, क्योंकि नवम्बर में वे निवृत्त हो रहे हैं । उसके पश्चात् वे भी मेरी भांति सामान्य अधिवक्ता होंगे । न्यायालय में जब मैं उनसे प्रश्नोत्तर करुंगा, तब वे उत्तर नहीं दे पाएंगे । उन्हें ज्ञात है कि मैं सत्यनिष्ठ हूं एवं उनके कार्यप्रणाली का सत्य उजागर कर सकता हूं । मुझे छलने तथा बंदी बनाने के प्रयत्न चल रहे हैं । कर्नाटक में भी मेरे विरुद्ध प्रकरण प्रविष्ट किया गया है ; परंतु मैं भयभीत नहीं हूं । मैं बाधाओं के लिए तत्पर हूं ।

क्या है प्रकरण ?

खजुराहो (मध्यप्रदेश) के प्राचीन वामन मंदिर में भगवान श्रीविष्णु की खण्डित मूर्ति है । यह मंदिर पुरातत्त्व विभाग के नियंत्रण में है । उस मूर्ति को हटाकर वहां भगवान श्रीविष्णु की नयी मूर्ति स्थापित करने हेतु पुरातत्त्व विभाग को आदेश देने के लिए राकेश दलाल ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका प्रविष्ट की थी । इस याचिका को सरन्यायाधीश ने अस्वीकार करते हुए कहा – ‘नयी मूर्ति के लिए देवता के पास जाकर कहिए’ । इस कारण दुःखी हुए अधिवक्ता राकेश किशोर ने सरन्यायाधीश पर जूता फेंकने का प्रयास किया । अब वे उसी मूर्ति परिवर्तन की मांग के लिए वहां उपवास करने जा रहे हैं ।